कैंसर की चपेट में है भारतीय हॉकी का ताना-बाना : होर्स्ट वेन
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। होर्स्ट वेन विश्व हॉकी में जितनी प्रतिष्ठा रखते हैं, उतनी ही ख्याति उन्हें फुटबाल जगत में भी प्राप्त है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस महान कोच और खेल गुरु का मत है कि भारतीय हॉकी का ताना-बाना कैंसर की चपेट में है।
होर्स्ट ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को खेल के बाहरी स्वरूप से अधिक उसके अंदरूनी स्वरूप पर ध्यान देना चाहिए। अंदरूनी स्वरूप से आशय रणनीति बनाने और उसके अनुसार अपने खेल को ढालने से है।
बकौल होर्स्ट, "इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली है लेकिन उनमें इस खेल को लेकर बुद्धिमता की कमी है जबकि हॉकी में अब सोच अहमियत रखने लगी है।"
अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के मास्टर कोच 61 वर्षीय होर्स्ट बार्सिलोना के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन और म्यूनिख टेक्निकल विश्वविद्यालय के फिजिकल एजुकेशन विभाग में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं।
होर्स्ट मानते हैं कि आठ बार ओलंपिक का स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम हॉकी के रसातल में आज सिर्फ इसलिए पहुंची है क्योंकि इसे चलाने वाले लोग 'बिना सोचे समझे' अपना काम करते हैं।
बकौल होर्स्ट, "मैं माफी चाहूंगा लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि भारतीय हॉकी को चलाने वालों में सोच की कमी है। उनके अंदर किसी प्रकार की दृष्टि नहीं है।"
स्पेन को ओलंपिक का रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले होर्स्ट मानते हैं कि भारत में हॉकी का विकास तभी हो सकता है, जब यहां युवाओं को केंद्रित करके प्रशिक्षण शिविर चलाए जाएं।
होर्स्ट मानते हैं कि विकास के लिए भारतीय हॉकी को अच्छे कोच की जरूरत है। उन्होंने कहा, "भारत को जोस ब्रासा के रूप में एक अच्छा कोच मिला है। हॉकी इंडिया को कोचों के लिए शिविर आयोजित करने चाहिए। इन शिविरों में आधुनिक तकनीक और अंतर्राष्ट्रीय हॉकी के बारे में ताजा जानकारियां दी जानी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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