फुटबाल विश्व कप : एशियाई चुनौती की अगुआई करेगा जापान
एशिया महाद्वीप की सबसे शक्तिशाली टीम का दर्जा हासिल करने वाली जापानी टीम अपने सामने आए पिछले तीन मौकों को अच्छी तरह भुना नहीं सकी। वर्ष 2002 में उसने अपने ग्रुप में रूस, ट्यूनिशिया और बेल्जियम की मौजूदगी के बावजूद सबसे ऊपर रहते हुए नॉकआउट दौर में खेलने की योग्यता हासिल की थी। विश्व कप में यह उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
वर्ष 2006 में जर्मनी में आयोजित विश्व कप में जापान की टीम अपने पहले ही मुकाबले में आस्ट्रेलिया के हाथों 1-3 से हार गई थी। उसके बाद उसने क्रोएशिया को गोलरहित बराबरी पर रोका था लेकिन तीसरे ग्रुप मुकाबले में उसे ब्राजील से 1-4 के अंतर से हार मिली थी।
जापानी टीम इस बार अपने महान मिडफील्डर हिदेतोशी नाकाता के बगैर दक्षिण अफ्रीका पहुंच रही है। वर्ष 1998, 2002 और 2006 के विश्व कप में अपनी टीम के लिए अतुलनीय योगदान देने वाले नकाता ने 29 वर्ष की उम्र में फुटबाल से संन्यास की घोषणा कर दी थी।
वैसे इस बार जापान की चुनौती मुख्य रूप से सेल्टिक के लिए खेलने वाले सुनसुके नाकामुरा, युवा मिडफील्डर केसुके होंडा और दिग्गज कप्तान यूजी नाकाजावा पर होगी। होंडा को जहां नकाता की तरह प्रतिभाशाली माना जाता है वहीं नाकाजावा के पास 90 मैचों का अनुभव है। वह जापान के तीसरे सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं।
जापान के पास अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल का अपार अनुभव है। उसे एशियाई फुटबाल का पावरहाउस कहा जाता है और इस बात को उसने 2002 विश्व कप में साबित भी किया था लेकिन उसके बाद जापानी खिलाड़ियों के खेल में वह चमक नहीं दिखी, जिसकी आशा की जा रही थी।
इस बार हालांकि युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण यह उम्मीद एक बार फिर बलवती हुई है। इसी उम्मीद के दम पर जापानी टीम विश्व कप जीतने वाली पहली एशियाई टीम होने का गौरव हासिल करने के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंचेगी।
जापान को ग्रुप-ई में हालैंड, डेनमार्क और अफ्रीकी पावरहाउस कैमरून के साथ रखा गया है। उसका पहला मैच 14 जून को ब्लोएमफोंटेन के फ्री-स्टेट फुटबाल स्टेडियम में कैमरून के साथ होना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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