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आईएचएफ की मान्यता समाप्त करना अवैध : उच्च न्यायालय

न्यायालय के इस फैसले ने आईएचएफ के अध्यक्ष पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर पाल सिंह गिल को खुशी प्रदान की है।

न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने अपने फैसले में कहा, "आईएचएफ की मान्यता रद्द करने के संबंध में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा पेश की गई दलीलें न्यायालय को बेबुनियाद लगीं। इस संबंध में दिए गए आदेश से आईएचएफ के साथ नाइंसाफी हुई है क्योंकि उसे इस संबंध में कोई कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया गया था। यह प्राकृतिक न्याय के कानून का उल्लंघन है।"

उल्लेखनीय है कि आईओए ने अप्रैल 2008 में आईएचएफ की मान्यता रद्द कर दी थी। बाद में खेल मंत्रालय भी इस फैसले में आईओए के साथ दिखा। इसके बाद आईओए ने हॉकी इंडिया (एचआई) नाम की एक अलग संस्था का गठन किया जो भारत में हॉकी को नियंत्रित करने वाली अंतरिम इकाई के तौर पर काम कर रही है।

न्यायालय ने आईएचएफ की मान्यता रद्द करने को अवैध करार देते हुए कहा, "खेल महासंघों के पास एक स्तर तक स्वायत्तता होनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में नियंत्रक का काम करना चाहिए। अगर खेल संघों से जुड़े लोग खेलों के विकास के लिए वाकई चिंतित हैं और अच्छे तरीके से काम कर रहे हैं तो संघों को लोकतांत्रिक तरीके से काम करने देना चाहिए।"

"अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हार और जीत लगी रहती है। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं। इसके लिए किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना देश में खेल के विकास के लिए ठीक नहीं। भारतीय हॉकी टीम के खराब प्रदर्शन की तह में जाने के लिए जांच होनी चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि आईएचएफ पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए। बीते को बिसारकर भविष्य की ओर देखने का वक्त आ गया है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:37 [IST]
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