फीफा विश्व कप : 2002 का प्रदर्शन दोहरा सकेगा दक्षिण कोरिया?
दक्षिण अफ्रीका में 11 जून से खेले जाने वाले फीफा विश्व कप में उसके सामने अपने उसी प्रदर्शन को जीवंत करने का दबाव होगा। वैसे भी कोरियाई टीम ने एशिया में सबसे अधिक बार विश्व कप खेला है और इस लिहाज से एशियाई चुनौती मुख्य रूप से उसी के हाथ में है।
दक्षिण कोरिया ने 1986 के बाद से कुल आठ बार और लगातार सात बार विश्व कप में खेलने का गौरव हासिल किया है। शुरुआती छह मौकों पर कोरियाई टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी लेकिन 2002 में उसने इटली, पुर्तगाल और स्पेन को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाकर सबको चौंका दिया था।
यह अलग बात है कि सेमीफाइनल में उसे जर्मनी के हाथों अंतिम मिनट में 0-1 से हार झेलनी पड़ी। कोरियाई टीम अंतिम रूप से चौथे स्थान पर रही, जो उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। एक बार फिर यह टीम विश्व कप की चुनौती के लिए तैयार है और उसके सभी खिलाड़ियों के जेहन में 2002 का प्रदर्शन कौंध रहा होगा।
आज की कोरियाई टीम पूरी तरह वैश्विक है। कोच हुह जुंग मू को मैनचेस्टर युनाइटेड के लिए खेलने वाले विंगर पार्क जी सुंग, बोल्टन वांडर्स के लिए खेलने वाले मिडफील्डर ली चुंग योंग और मोनाको के लिए खेलने वाले स्ट्राइकर पार्क यू यंग पर भरोसा करना होगा।
इसके अलावा कोरियाई टीम को पीएसवी इदेनहोवन, टॉटेनहम हॉट्सपर और बोरुसिया डार्टमंड जैसे प्रमुख क्लबों के लिए खेलने वाले लेफ्ट बैक ली यंग प्यो से भी काफी उम्मीदें होंगी। ली फिलहाल साउदी अरब के क्लब अल हिलाल के लिए खेलते हैं।
यह टीम 2006 में पहले दौर से ही बाहर हो चुकी थी। वह स्विट्जरलैंड और फ्रांस के बाद चार अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी लेकिन इस बार हुह को यकीन है कि उनके खिलाड़ी दूसरे दौर में पहुंचकर ही दम लेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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