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आईसीसी की कमान पवार के हाथ, भारत-पाक श्रृंखला की वकालत की (राउंडअप)

By Super

इस पद के लिए पवार का चयन पहले ही कर लिया गया था। पवार ने अध्यक्ष पद संभालते ही भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रुके पड़े क्रिकेट रिश्ते को बहाल करने की चर्चा छेड़ दी।

भारतीय राजनीति में बड़ा कद रखने वाले और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष पवार ने डेविड मॉर्गन की जगह ली है। मॉर्गन ब्रिटेन के हैं और वर्ष 2007 से वही आईसीसी की कमान संभाल रहे थे। पवार 2008 से आईसीसी के उपाध्य्क्ष की भूमिका निभा रहे थे।

वैसे पवार आईसीसी की कमान संभालने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले जगमोहन डालमिया आईसीसी के प्रमुख रह चुके हैं। डालमिया ने वर्ष 1997 में यह पद संभाला था। डालमिया की अध्यक्षता में आईसीसी ने व्यापक विस्तार किया था। इस दिशा में डालमिया का योगदान हमेशा याद किया जाता है।

पवार ने आईसीसी की कमान उस समय संभाली है जब भारतीय उपमहाद्वीप में अगले साल विश्व कप (एकदिवसीय) का आयोजन हो रहा है। विश्व कप की मेजबानी भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश संयुक्त रूप से करेंगे।

पदभार संभालने के मौके पर पवार ने मॉर्गन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "डेविड मॉर्गन ने आईसीसी के संचालन के संदर्भ में सिद्धांत स्थापित किए हैं। अब यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि उनकी विरासत को मजबूत किया जाए।"

इस अवसर पर मॉर्गन ने कहा, "क्रिकेट के लिए मेरे योगदान को लेकर बीते कुछ दिनों के दौरान बहुत लोगों ने मुझे धन्यवाद दिया। मैं सिर्फ यही कहूंगा कि मेरे योगदान के मुकाबले क्रिकेट ने मुझे कहीं ज्यादा दिया है।"

वर्ष 2006 में आईसीसी के 10 स्थायी सदस्यों के मतदान के दौरान पवार और मॉर्गन को बराबर-बराबर मत मिले थे। इसके बाद दोनों बारी-बारी से आईसीसी प्रमुख का पदभार संभालने पर सहमत हुए थे।

बतौर क्रिकेट प्रशासक पवार का करियर वर्ष 2001 में शुरू हुआ था। उन्होंने भारतीय टीम के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर को हराकर मुंबई क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था। इसके बाद एक क्रिकेट प्रशासक के रूप में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता चला गया।

भारतीय क्रिकेट में पवार के एक बड़ी ताकत बनने का सिलसिला वर्ष 2005 में उस समय आरंभ हुआ जब उन्होंने डालमिया को पराजित किया। इसके बाद बीसीसीआई में उनका रुतबा बढ़ता चला गया।

पवार से पहले आईसीसी के प्रमुखों के नाम और उनका कार्यकाल इस प्रकार है : बतौर चेयरमैन- लॉर्ड कोलिन काउंड्रे (1989-93) और क्लाइड वॉलकॉट (1993-97)। बतौर अध्यक्ष- जगमोहन डालमिया (1997-2000), मैल्कम ग्रे (2000-2003), पर्सी सॉन (2006-2007), रे माली (2007-2008), और डेविड मॉर्गन (2008-10)।

पवार ने आईसीसी के अगले उपाध्यक्ष के तौर पर आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड की दावेदारी नकारे जाने के सवाल पर कहा कि इस संबंध में किसी प्रकार की राजनीति नहीं हुई है।

पवार ने पत्रकारों से कहा, "इसमें राजनीतिक संबंध क्या है? यह सब गलत बाते हैं। मैं नहीं मानता कि हावर्ड की दावेदारी नकारे जाने के संबंध में आईसीसी में किसी प्रकार की फूट पड़ी है। यह मसला गंभीर था और यही कारण है कि इस पर विस्तार से चर्चा की गई। जो भी निर्णय लिया गया है वह लोकतांत्रिक आधार पर लिया गया है। मैं किसी बात को लेकर चिंतित नहीं हूं।"

इस संबंध में आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोगर्ट ने कहा कि आईसीसी अपने द्वारा लिए गए फैसले को लेकर सफाई देना जरूरी नहीं समझता। बकौल लोगर्ट, "आईसीसी को कारण बताने की जरूरत नहीं है। हावर्ड के नामांकन को लेकर पर्याप्त समर्थन नहीं था। क्रिकेट आस्ट्रेलिया और क्रिकेट न्यूजीलैंड को अपनी उम्मीदवारी पर फिर से विचार करना होगा। इस संबंध में उन्हें अगस्त तक का समय दिया गया है।"

इस संबंध में पवार ने कहा, "हम सीए और एनजेडसी की दावेदारी पर गौर करेंगे।" उपाध्यक्ष के तौर पर चयन होने की स्थिति में हावर्ड 2012 में आईसीसी के अगले अध्यक्ष होते लेकिन अब सीए और एनजेडसी को किसी नए उम्मीदवार का नाम सामने रखना होगा।

उधर, आईसीसी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैल्कम स्पीड ने कहा है कि हावर्ड की उम्मीदवारी सिर्फ इसलिए खारिज कर दी गई क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिंबाब्वे की राबर्ट मुगाबे की सरकार का विरोध किया था।

स्पीड ने कहा, "हावर्ड की उम्मीदवारी सिर्फ इसलिए नहीं नकारी गई कि उनके पास क्रिकेट प्रशासन का कम अनुभव है। असल कारण यह है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिंबाब्वे की राबर्ट मुगाबे की सरकार का विरोध किया था और यह बात किसी को पसंद नहीं आई। उन्होंने मुथैया मुरलीधन के एक्शन को लेकर बेबाक बयान दिया था जो कि लोगों को पसंद नहीं आया था।"

स्पीड ने आरोप लगाया कि हावर्ड की तरह पवार को भी क्रिकेट प्रशासन का अनुभव नहीं है। उन्होंने कहा, "पवार भारत के कृषि मंत्री हैं। यह एक अरब से अधिक लोगों का पेट भरने का गंभीर कार्य है। इसके अलावा पवार को किसी अन्य काम के लिए समय नहीं मिलता। वह पूर्ण रूप से नहीं बल्कि आईसीसी के पार्टटाइम अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे। उनके लिए राजनीति सर्वोपरि है और क्रिकेट का स्थान उसके बाद ही आता है।"

इस बीच, पवार ने अध्यक्ष बनते ही भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट रिश्तों की बहाली की चर्चा की। पवार ने कहा कि भारत-पाक के बीच रुके पड़े क्रिकेट रिश्ते जल्द ही बहाल हो सकते हैं।

पवार ने हालांकि यह भी कहा कि इसके लिए दोनों देशों की सरकारों की मंजूरी जरूरी है। पवार ने कहा, "सरकारें चाहेंगी तो भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमों के बीच द्विपक्षीय श्रृंखला फिर से शुरू हो सकती है। इससे संबंधों में सुधार आ सकता है। हमें (बीसीसीआई) इससे कोई आपत्ति नहीं। हमें तो खुशी होगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:39 [IST]
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