समाचार पत्र 'द गार्जियन' के मुताबिक कापेलो ने इस सूची को लेकर नाराजगी जाहिर की है और साथ ही इसे इंटरनेट पर से हटाए जाने की मांग की है। कापेलो ने कहा कि इस विवादास्पद सूची में उनकी इजाजत शामिल नहीं है।
पत्र ने कापेलो के हवाले से लिखा है, "मैंने इस विवादास्पद सूची को तैयार नहीं किया है और न ही इसे प्रकाशित करने की इजाजत दी है।"
वरीयता क्रम के आधार पर तैयार इस सूची में इंग्लैंड खिलाड़ियों को फीफा विश्व कप-2010 के अंतिम-16 दौर में जर्मनी के हाथों मिली हार के बाद बेहद कमतर वरीयता क्रम दिया गया है।
इंग्लैंड में फुटबाल की शीर्ष संस्था-फुटबाल एसोसिएशन (एफए) ने भी इस सूची को नकार दिया है। एफए ने अपने बयान में कहा कि वह इस सूची को मान्यता नहीं दे रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।