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हॉकी इंडिया और कलमाडी पर बरसे परगट (लीड-1)

पिछले कुछ समय से कलमाडी पर खुलकर 'हमले' करने वाले परगट ने कहा कि कलमाडी 'भारतीय खेल जगत का गंदा चेहरा' हैं। परगट ने साथ ही कहा कि हाल ही में सामने आए यौन उत्पीड़न के मामले पर एचआई गैरजिम्मेदाराना रुख अपना रही है।

परगट ने कहा, "बीते दो वर्षो में सरकार ने हॉकी इंडिया को 13 करोड़ रुपये दिए हैं लेकिन किसी को इस बात का अंदाजा नहीं कि वह रकम कहां खर्च की गई। हॉकी इंडिया में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। यही नहीं, हॉकी इंडिया ने सरकार के दिशा-निर्देशों की अवहेलना करते हुए एक 83 वर्षीया महिला (विद्या स्टोक्स) को अध्यक्ष पद के लिए नामांकित किया है।"

"इन सब घटनाओं के पीछे कलमाडी का हाथ है। वह चाहते हैं कि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष पद पर कोई ऐसा व्यक्ति बैठे, जिसे वह 'रबर स्टैम्प' की तरह उपयोग में ला सकें। अगर नरेंद्र बत्रा (महासचिव) का खेमा यह चुनाव जीतता है तो यह संस्था हॉकी इंडिया नहीं बल्कि हॉकी कलमाडी कहलाएगी।"

परगट ने कहा कि कलमाडी ने हॉकी के साथ-साथ भारतीय ओलंपिक आंदोलन को भी पथभ्रष्ट कर दिया है। बकौल परगट, "कलमाडी भारतीय खेल का गंदा चेहरा हैं। वह ओलंपिक आंदोलन की बात करते हैं लेकिन उन्होंने ही देश में ओलंपिक आंदोलन को रसातल में पहुंचाया है। ऐसे लोगों को खेल का हिस्सा नहीं होना चाहिए।"

परगट मानते हैं कि तमाम मुश्किलों से गुजरकर हॉकी एक बार फिर भारत में फलेगी-फूलेगी। उन्होंने कहा, "लोगों के अंदर अभी भी हॉकी के प्रति प्यार है। प्रायोजकों के लिए क्रिकेट महंगा होता जा रहा है, ऐसे में हॉकी के विपणन की भी अपार संभावनाएं बनती जा रही हैं।" हॉकी इंडिया का चुनाव 28 जुलाई को होना है और परगट तथा मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष स्टोक्स अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।

परगट के मुताबिक महिला हॉकी टीम के कोच महाराज किशन कौशिक के खिलाफ सामने आए यौन उत्पीड़न के मामले पर एचआई का रुख बिल्कुल बच्चों जैसा है। परगट ने कहा, "एचआई ने इस मामले पर बच्चों जैसा रुख दिखाया है। यह सब असक्षम प्रशासन के कारण हो रहा है। ये (एचआई पदाधिकारी) किसी भी मामले को पेशेवर तौर पर नहीं संभाल सकते।"

परगट ने कहा कि इस मामले को आईओए को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लेना चाहिए था। बकौल परगट, "इस मामले में आईओए को कानून के किसी जानकार को स्वतंत्र जांच का आदेश देना चाहिए था। ऐसे मामलों के लिए एक विशेष शिकायत सेल होनी चाहिए। ऐसे मामले स्वतंत्र रूप से संभाले जाने चाहिए और इसमें किसी तरह की राजनीति को जगह नहीं मिलनी चाहिए। किसी भी खिलाड़ी को बिना डर के अपनी शिकायत सामने रखने का अधिकार है।"

उल्लेखनीय है कि भारतीय टीम की सदस्य रंजीता देवी ने कौशिक पर यौन उत्पीड़न के प्रयास का आरोप लगाया था। इस मामले में कौशिक ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उन्होंने खुद को निर्दोष करार दिया है। एक अन्य मामले में टीम के वीडियोग्राफर एम. बासवराज को चीन दौरे में एक विदेशी यौनकर्मी के साथ संवेदनशील अवस्था में दिखाई गई एक तस्वीर जारी की गई है। एचआई ने बासवराज को बर्खास्त कर दिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:41 [IST]
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