खेल मंत्रालय ने आईएचएफ को दी मान्यता (लीड-1)
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को के.पी.एस.गिल के नेतृत्व वाले इंडियन हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) को हॉकी की प्रतिनिधि संस्था के रूप में मान्यता दे दी।
खेल मंत्रालय का यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब एक दिन पहले मंत्रालय ने गुरुवार के चुनाव में अपने दिशानिर्देशों का पालन न करने के आरोप में हॉकी इंडिया (एचआई) की अस्थायी मान्यता वापस ले ली थी।
मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) के अध्यक्ष लींड्रो नीगरे को इस घटना के बारे में एक पत्र लिख कर सूचित कर दिया है।
पत्र में मंत्रालय ने लिखा है, "सरकार ने पांच अगस्त, 2010 को जारी आदेश के तहत हॉकी इंडिया की मान्यता समाप्त कर दी है। उसकी एक प्रति आपको भेज दी गई है। यानी एचआई देश में हॉकी के प्रबंधन, नियंत्रण और प्रसार के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल परिसंघ (एनएसएफ) नहीं रह गई है। इसके पास अब राष्ट्रीय टीम के गठन और उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भेजने का अधिकार भी नहीं रहेगा।"
मंत्रालय के पत्र में कहा गया है, "इस घटना के मद्देनजर सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 21.05.2010 के फैसले के आलोक में आईएचएफ को भारत में एनएसफ की प्रतिनिधि संस्था के रूप में मान्यता दे दी है।"
पत्र में आगे लिखा गया है, "आपसे निवेदन किया जाता है कि एचआई के साथ किसी भी तरह का व्यावसायिक करार न करें और न तो कोई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सेदारी की जिम्मेदारी ही सौंपे। क्योंकि एचआई अब भारत में हॉकी के लिए एनएसएफ नहीं रह गई है। सरकार ने उसकी मान्यता समाप्त कर दी है। यह अब एक निजी संस्था बन कर रह गई है।"
गिल ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है।
गिल ने कहा, "मैं सरकार के निर्णय का स्वागत करता हूं। यह हॉकी के ढांचे के पुननिर्माण के लिए एक सकारात्मक कदम है। प्रायोजकों की कोई कमी नहीं है। हम हॉकी के प्रसार के लिए प्रायोजकों को लाएंगे।"
इसके पहले हॉकी इंडिया (एचआई) के महासचिव नरेंद्र बत्रा ने शुक्रवार को खेल मंत्रालय पर आरोप लगाते हुए कहा कि मंत्रालय परगट सिंह को एचआई के अध्यक्ष पद के तौर पर देखना चाहता था, लेकिन जब परगट की चुनावों में हार हुई तो उसने एचआई की मान्यता समाप्त कर दी।
बत्रा के मुताबिक खेल मंत्रालय ने परगट को अध्यक्ष पद के लिए चुनने हेतु एचआई पर दबाव डाला था लेकिन जैसे ही विद्या स्टोक्स ने परगट को पराजित किया, खेल मंत्रालय ने हिसाब चुकाने के लिए एचआई की मान्यता समाप्त कर दी।
बत्रा ने कहा, "परगट को अध्यक्ष बनाने के लिए हमारे ऊपर काफी दबाव था। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर मंत्रालय किसी एक उम्मीदवार में इतनी रुचि क्यों ले रहा था।"
"हमने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार चुनाव के परिणाम घोषित नहीं किए लेकिन मंत्रालय को जैसे ही इसकी जानकारी मिली कि परगट हार गए हैं, उसने हम पर तमाम तरह के आरोप लगाकर हमारी मान्यता रद्द कर दी। मैं पूछना चाहता हूं कि मंत्रालय को चुनाव परिणाम कहां से मिला, क्या उसे परगट ने परिणाम के बारे में बताया है?"
गुरुवार को हुए चुनावों में स्टोक्स को अध्यक्ष और बत्रा को महासचिव चुना गया था। स्टोक्स ने परगट को 20 मतों के अंतर से पराजित किया था जबकि बत्रा ने गुंजुम हैदर को भारी मतों से हराया था। एचआई का यह चुनाव सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद कराया गया था। सर्वोच्च न्यायालय एचआई, खेल मंत्रालय और दिल्ली तथा बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव पर तीन सप्ताह के रोक के मामले में 19 अगस्त को अंतिम रूप से सुनवाई करेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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