मैच फिक्सिंग विवाद : आईसीसी ने 'आरोपी तिकड़ी' को निलंबित किया (लीड-1)
आईसीसी ने अपने बयान में कहा कि तीनों खिलाड़ियों को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत निलंबित किया जा रहा है। आईसीसी ने साफ कर दिया है कि उसने इस बात की आधिकारिक जानकारी खिलाड़ियों और उनके संबंद्ध बोर्ड को दे दी है। यह पहला मौका है जब आईसीसी ने भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत आरोप के घेरे में आए खिलाड़ियों को निलंबित किया है।
आईसीसी ने अपने बयान में कहा, "भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत स्पॉट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे खिलाड़ियों को जांच पूरी होने तक किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं मिल सकती। ऐसे में इन आरोपों से घिरे तीनों खिलाड़ियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इस बात की जानकारी खिलाड़ियों के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को दे दी गई है।"
आईसीसी ने भले ही तीनों आरोपी खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया हो लेकिन पाकिस्तान अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि ये खिलाड़ी दोषी हैं। उलटे पाकिस्तान ने इस संबंध में सारा आरोप परोक्ष रूप से भारतीय सटोरियों पर मढ़ा है।
पाकिस्तान ने इस आरोप में घिरे अपने तीन खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा है कि उनके खिलाड़ी पूरी तरह 'निर्दोष' हैं और इस विवाद के लिए पूरी तरह भारतीय सटोरिए जिम्मेदार हैं।
लंदन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त वाजिद शमसुल हसन ने समाचार चैनल 'एनडीटीवी' के साथ बातचीत के दौरान कहा, "मैंने पाया है कि पाकिस्तानी टीम के तीनों खिलाड़ी पूरी तरह निर्दोष हैं। इस मामले में आरोपी मजहर माजिद ने कुछ एशियाई सटोरियों की मदद से उन्हें फंसाया है।"
हसन ने कहा कि ब्रिटिश मीडिया कह रहा है कि इस मामले में शामिल सटोरिए एशियाई हैं लेकिन अगर वे पाकिस्तानी हैं तो ब्रिटिश मीडिया ने उन्हें साफ तौर पर पाकिस्तानी कहकर पुकारा होता। ऐसे में यह साफ है कि इस मामले में भारतीय सटोरिए शामिल हैं।
हसन ने यह भी मानने से इंकार कर दिया कि तीनों आरोपी खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों के कारण ही टीम से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि तीनों ने खुद ही श्रृंखला से दूर रहने का फैसला किया है।
हसन ने कहा, "जो कुछ हो रहा है उससे तीनों बहुत परेशान हैं। इस स्थिति में खेल पर ध्यान लगा पाना नामुमकिन है। उन्होंने साफ किया है कि वे निर्दोष हैं और जांच पूरी होने तक टीम से दूर ही रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिना कारण के उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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