आईसीसी ने शुक्रवार को मैच फिक्सिंग के आरोपी पाकिस्तानी खिलाड़ी-मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद आमेर और सलमान बट्ट को जांच पूरी होने तक निलंबित करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक जांच की बात कही थी। आईसीसी के इस फैसले की लंदन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त वाजिद शमसुल हसन ने आलोचना की थी। वैसे यह पहला मौका है जब आईसीसी ने भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत आरोप के घेरे में आए खिलाड़ियों को निलंबित करते हुए आपराधिक जांच करने का फैसला किया है।
ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' के अनुसार आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (एसीयू) के प्रमुख रोनी फ्लैनगन ने कहा, "आरापी खिलाड़ियों के खिलाफ नियम-2 के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में सभी साक्ष्य ढूंढ़े जाएंगे। इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि पाकिस्तानी क्रिकेट को लेकर यह किसी तरह की साजिश है।"
इससे पहले आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोगार्ट ने कहा था, "भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत स्पॉट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे खिलाड़ियों के खिलाफ आपराधिक जांच की जाएगी। इसके पूरा होने तक इन खिलाड़ियों को किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं मिल सकती।"
आईसीसी के फैसले को 'गैरजरूरी' बताते हुए हसन ने कहा था, "ऐसे में जबकि इसे लेकर पुलिस जांच जारी है, किसी भी संस्था को इस मामले से फिलहाल दूर ही रहना चाहिए था। खिलाड़ी स्वेच्छा से क्रिकेट से दूर जा चुके हैं, ऐसे में यह फैसला न्यायोचित और वक्त के हिसाब से जायज नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।