सुशील की सफलता से कुश्ती खेमे में खुशियां लौटीं
सुशील ने रविवार को रूस के पहलवान गोगायेव को हराकर विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में 66 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण जीता। यह सफलता हासिल करने वाले सुशील पहले भारतीय हैं। सुशील ने बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।
डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष जी.एस. मांदेर ने सुशील की इस सफलता की सराहना की है। मांदेर ने कहा कि सुशील ने हर स्तर पर अपनी काबिलियत को साबित किया है।
मांदेर ने कहा कि ऐसे में जबकि देश के छह खिलाड़ी डोप टेस्ट में फंस गए थे और इस कारण डब्ल्यूएफआई में गमगीन माहौल था, सुशील ने अपनी सफलता से सबके चेहरों पर खुशी लौटा दी है।
बकौल मांदेर, "हमारे लिए यह बहुत राहत की बात है। बीते वर्षो में फेडरेशन ने साफ-सुथरे खेल के लिए काफी मेहनत की है लेकिन इसके बावजूद छह खिलाड़ियों का डोप टेस्ट में नाकाम होना हमारे लिए बेहद दुख की बात थी। सुशील की स्वर्णिम सफलता ने हमारे खिलाड़ियों के अंदर सकारात्मक उर्जा का संचार किया है।"
डब्ल्यूएफआई के सचिव और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके पहलवान करतार सिंह ने भी सुशील की इस सफलता पर खुशी व्यक्त की है।
करतार ने कहा, "मैं सुशील की इस सफलता से रोमांचित हूं। देश को उनसे स्वर्ण की उम्मीद थी। उन्होंने किसी को निराश नहीं किया। मैंने सुशील से कहा था कि फाइनल में उसका सामना रूसी पहलवान से होगा और ऐसा हुआ भी। सुशील ने शानदार खेल दिखाते हुए देश का नाम रोशन किया।"
1982 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले कोच सतपाल सिंह ने कहा कि सुशील ने विश्व चैम्पियनशिप के लिए जोरदार तैयारी की थी। उसे इस तैयारी का फल मिला है।
बतौल सतपाल, "सुशील को मेहनत का फल मिला है। उसने इस चैम्पियनशिप के लिए दिन-रात एक कर दिया था। सुशील को लेकर मैंने हमेशा माना है कि वह बड़ी सफलताएं हासिल कर सकता है। इस सफलता के बाद हर किसी को यकीन हो गया है कि उसने बीजिंग में भाग्य भरोसे कांस्य नहीं जीता था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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