चैम्पियंस लीग : मुंबई इंडियंस को पहली जीत की तलाश

By Staff

साउथ आस्ट्रेलिया टीम अपने पहले मैच में लायंस को 11 रन हराकर पूरे अंक बटोर चुकी है लेकिन तेंदुलकर की कप्तानी पारी के बावजूद कमजोर लायंस के हाथों करारी हार को मजबूर इंडियन प्रीयिमर लीग की उविजेता मुंबई इंडियंस को अब तक पहली जीत की तलाश है।

कद और प्रतिष्ठा के लिहाज से मुंबई इंडियंस का पलड़ा भारी है लेकिन जैसा कि पहले मैच के नतीजे से साफ है कि ट्वेंटी-20 में किसी टीम को सिर्फ इसलिए कमजोर नहीं समझना चाहिए क्योंकि उसके पास मशहूर चेहरों की कमी है।

जाहिर तौर पर मुंबई की टीम ने अपने पहले ही मैच से यह गांठ बांध लिया होगा कि कम से कम चैम्पियंस लीग में किसी टीम को कमजोर मानने की भूल हार ही हो सकती है। यही देखते हुए मुंबइया टीम सटीक रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी।

मुंबई के लिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी के क्षेत्र में फिलहाल कोई समस्या नहीं है। तेंदुलकर से लेकर शिखर धवन, ज्यां पॉल ड्यूमिनी, अंबाती रायडू और केरन पोलार्ड जैसे खिलाड़ी उसे बड़ा स्कोर देने की भरपूर कुव्वत रखते हैं।

गेंदबाजी में जहीर खान आक्रमण की कमान संभालेंगे। साथ ही दूसरे छोर पर रेयान मैक्लॉरेन टीम को आशातीत सफलता दिलाने का प्रयास करेंगे। तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा के रूप में मुंबई की टीम के पास एक विकेट झटकने वाला गेंदबाज है। यही नहीं, हरभजन भी अपनी फिरकी में साउथ आस्ट्रेलिया को फंसाने का माद्दा रखते हैं।

दूसरी ओर, लायंस पर मिली जीत से साउथ आस्ट्रेलियाई टीम का मनोबल काफी ऊंचा है। कप्तान मिशेल क्लींगर की शानदार पारी ने साबित कर दिया कि वह अपने साथ किसी भी टीम को टक्कर देने के लिए तैयार हैं। कैलम फग्र्यूसन ने जिस तूफानी अंदाज में उनका साथ दिया था, वब काबिलेतारीफ लेकिन दूसरी टीमों के लिए खतरे की घंटी है।

इस संबंध में विक्टोरिया बुशरेंजर्स टीम के कप्तान डेविड हसी का एक बयान काफी मायने रखता है। हसी ने चैम्पियंस लीग के दूसरे दिन कहा था कि अपने देश की कोई भी चैम्पियन टीम चैम्पियनों की चैम्पियन टीम को हराने का माद्दा रखती है। यही बात चैम्पियंस लीग को खास बनाता है।

चैम्पियंस लीग ने खुद को शोहरत की बुलंदियों को छू चुकी आईपीएल के बाद विश्व क्रिकेट की सबसे लोकप्रिय गैर आधिकारिक ट्वेंटी-20 प्रतियोगिता के तौर पर स्थापित किया है। वर्ष 2009 में भारत में आयोजित इसका पहला संस्करण खासा लोकप्रिय रहा था।

पिछले वर्ष आस्ट्रेलियाई टीम न्यू साउथ वेल्स ने वेस्टइंडीज की घरेलू चैम्पियन टीम त्रिनिदाद एवं टोबैगो को हराकर खिताब जीता था। पहले संस्करण में कुल 12 टीमों ने हिस्सा लिया था लेकिन इस बार इस कुल 10 टीमों के बीच श्रेष्ठता की जंग हो रही है।

चैम्पियंस लीग के दूसरे संस्करण में न्यूजीलैंड से सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स स्टैग्स, भारत से चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और बेंगलोर रॉयल चैलेंजर्स, वेस्टइंडीज से गयाना, दक्षिण अफ्रीका से लायंस और वारियर्स, आस्ट्रेलिया से साउथ आस्ट्रेलिया और विक्टोरिया तथा श्रीलंका से वायंबा की टीमें हिस्सा ले रही हैं।

10 टीमों को पांच-पांच के दो ग्रुप में विभाजित किया गया है। ग्रुप-ए में चेन्नई सुपर किंग्स, वारियर्स, विक्टोरिया, सेंट्रल डिस्ट्रिक्स और वायंबा को रखा गया है जबकि ग्रुप बी में मुंबई इंडियंस, लायंस, साउथ आस्ट्रेलिया, रॉयल चैलेंजर्स और गयाना की टीमें हैं। वर्ष 2009 की तरह इस बार भी चैम्पियंस लीग में 60 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि दांव पर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Monday, September 13, 2010, 15:53 [IST]
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