मैंने सोचा रणनीति के तहत आमेर ने फेंकी है नो-बॉल : हिल
हिल को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि आमेर की वह गेंद विवादों में घिर जाएगी क्योंकि अंपायर होने के नाते उनका काम सही-गलत का फैसला कर निर्णय सुनाना होता है, किसी खिलाड़ी पर शक करना नहीं।
समाचार पत्र 'डोमिनियन पोस्ट' ने हिल के हवाले से लिखा है, "मैं और मेरे साथी अंपायर बिली बॉडन मैदान में थे। हम इस घटना के गवाह बने लेकिन हम कभी भी किसी बात पर संदेह नहीं करते। हमने देखा कि वह नो-बॉल थी और हमने अपना फैसला सुना दिया।"
"पहली नजर में मुझे लगा था कि आमेर ने काफी समय से विकेट पर टिके ट्रॉट को परेशान करने के इरादे से नो-बॉल फेंकी है लेकिन बाद में उस गेंद की असलियत का पता चला। तेज गेंदबाज अक्सर काफी आगे निकलकर गेंद फेंक देते हैं, ऐसे में बार-बार उन पर शक नहीं किया जा सकता।"
आमेर और फिर उसी मैच में मोहम्मद आसिफ द्वारा नो-बॉल फेंका जाना क्रिकेट इतिहास की सबसे शर्मनाक घटनाओं में दर्ज हो गया क्योंकि एक ब्रिटिश समाचार पत्र ने खुलासा किया कि इन गेंदबाजों ने सटोरिए से पैसे लेकर नियत समय पर नो-बॉल फेंकी थी। इसे क्रिकेट की भाषा में स्पॉट फिक्सिंग कहा जाता है।
इस घटना में आमेर और आसिफ के अलावा पाकिस्तानी टीम के कप्तान सलमान बट्ट भी शामिल बताए गए। तीनों खिलाड़ियों के खिलाफ जांच चल रही है और आईसीसी उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर चुकी है। जांच का काम स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस और आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधी इकाई कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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