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पुजारा को पसंद है अपने दायरे में रहकर खेलना

नई दिल्ली, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के साथ खेली जाने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला के पहले मुकाबले के लिए भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किए गए सौराष्ट्र के होनहार बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जो अपने दायरे में रहकर खेलना पसंद करते हैं।

25 जनवरी, 1988 को राजकोट में जन्मे पुजारा के पास क्रिकेट की किताब के लगभग सभी शॉट हैं लेकिन इसके बावजूद वह उन्हीं पर ज्यादा भरोसा करते हैं, जिनमें उनकी महारथ है। पुजारा महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ की तरह विशुद्ध पारम्परिक अंदाज में खेलते हैं और विकेट के दोनों ओर शॉट लगा सकते हैं।

इसके बावजूद पुजारा की अपनी कुछ सीमाएं हैं। वह बेहद आक्रामक या उतावलापन लिया हुआ खेल नहीं खेलते। उनकी बल्लेबाजी में एक ठहराव है और इसी ठहराव का नतीजा है कि 22 वर्ष की उम्र में वह प्रथम श्रेणी मैचों में दो तिहरा शतक लगा चुके हैं।

चेतेश्वर की शैली उन्हें टेस्ट मैचों का सफल बल्लेबाज बना सकती है। खासतौर पर छठे या सातवें क्रम पर खेलते हुए कभी-कभी टीम को मुश्किल से उबारने की बारी आती है। ऐसे वक्त में पुजारा की बल्लेबाजी में दिखने वाला ठहराव टीम के काम आ सकता है।

कम उम्र का होने के बावजूद उनके खेल में एक प्रकार की गंभीरता दिखती है। वैसे औसत के लिहाज से उन्हें आक्रामक बल्लेबाज माना जा सकता है लेकिन मूलत: वह हर गेंद को ठीक से देखने और पढ़ने के बाद शॉट लगाने के लिए जाने जाते हैं।

पुजारा ने 49 प्रथम श्रेणी मैचों की 78 पारियों में 60 के आकर्षक औसत से अब तक 3925 रन बनाए हैं। उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत योग 302 नाबाद रहा है जबकि उनके खाते में 14 शतक और 13 अर्धशतक दर्ज हैं।

टेस्ट मैचों में भारत के लिए दो तिहरे शतक लगाने वाले एकमात्र बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की तरह उनका अर्धशतक को शतक में बदलने का दर शानदार है लेकिन मूल रूप से उनकी शैली द्रविड़ और वी.वी.एस. लक्ष्मण से मिलती है।

चेतेश्वर को क्रिकेट विरासत में मिली है। उनके पिता अरविंद पुजारा ने सौराष्ट्र के लिए रणजी खेला है जबकि उनका चाचा विपिन शिवलाल पुजारा सौराष्ट्र टीम के विकेटकीपर के तौर पर 36 मैच खेल चुके हैं।

इस लिहाज से मैदान में उनका आत्मविश्वास देखते बनता है। वर्ष 2005 में प्रथम श्रेणी का आगाज करने के बाद बहुत कम उम्र में ही वह सौराष्ट्र टीम के अभिन्न सदस्य बन गए और फिर भारतीय टीम की दरवाजा खटखटाने लगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:44 [IST]
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