राष्ट्रमंडल खेल : उद्घाटन समारोह में कब क्या हुआ
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रविवार शाम ठीक सात बजे 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह की शुरुआत हुई। उद्घाटन समारोह में सांस थाम लेने वाले कार्यक्रम पेश किए गए। यहां पेश है उद्घाटन समारोह की कुछ झलकियां :
आकर्षण का केंद्र विशालकाय गैस का गुब्बारा :
6.00 बजे : स्टेडियम 75 फीसदी भर चुका था। आकर्षण का केंद्र एर्सोटेट (विशालकाय गैस का गुब्बारा) शान के साथ स्टेडियम के बीचो-बीच खड़ा था। लोगों को इसके ऊपर उठने का इंतजार था। आखिरकार 40 करोड़ रुपये खर्च करके इसे खास तौर पर उद्घाटन समारोह में चार-चांद लगाने के लिए लाया गया था। इस गुब्बारे में 100 से अधिक आयताकार आइने लगाए गए थे, जिनके कारण छवि और रोशनी के परावर्तित होने से स्टेडियम की छटा और बढ़ जानी थी।
'शेरा-शेरा' गाने के साथ मनोरंजक कार्यक्रम :
स्टेडियम के एक कोने में (मीडिया लाउ्ंज) से मुखातिब, रंगारंग कार्यक्रम पांच बजे से ही शुरू हो चुका था। उद्घोषक नितिन अरोड़ा ने शानदार उद्घोषणा के साथ गायिका शिवानी कश्यप और आनंद राज आनंद को स्टेडियम के मध्य में प्रदर्शन के लिए बुलाया।
इसके बाद युनाइडेड इंडिया टीम (राष्ट्रमंडल खेल स्वयंसेवकों की टीम) को अपने प्रतीक गान के लिए बुलाया गया। इस संक्षिप्त मनोरंजन कार्यक्रम की समाप्ति शिवानी, आनंद राज आनंद और युनाइटेड इंडिया के गायकों द्वारा गाए गए 'शेरा-शेरा' गाने के साथ हुआ।
कृत्रिम रोशनी से नहाया स्टेडियम :
6.15 बजे : स्टेडियम कृत्रिम रोशनी से नहा गया। अल्ला रक्खा रहमान की घुनों से दर्शकों का मन मोहने का प्रयास चलता रहा। दर्शकों का लगातार आना जारी रहा। मीडियाकर्मी, सुरक्षाकर्मी, स्वयंसेवक, तकनीनिशयन, विदेशी टीवी चैनलों के पत्रकार और कैमरामैन, आधिकारिक प्रसारणकर्ता दूरदर्शन की टीम से लेकर सफाईकर्मी तक, हर कोई अहम क्षणों के लिए अपनी तैयारियों को परख लेना चाहता था।
प्रमुख लोगों का आगमन :
6.17 बजे राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीए) के प्रमुख माइक फेनेल, दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना और केंद्रीय खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल का स्टेडियम में आगमन हुआ।
6.22 बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का स्टेडियम में आगमन हुआ। ऐसा लगता है कि खेलों के आयोजन ने शीला की लोकप्रियता बढ़ा दी है। उनके स्टेडियम में आते ही दर्शकों ने जोर का नारा लगाया।
6.23 बजे केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी का आगमन। 6.24 बजे सीजीएफ-2010 आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी का प्रवेश। दर्शकों ने जोर का नारा लगाया।
6.45 बजे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम स्टेडियम पहुंचे। इस समय तक स्टेडियम 85 से 90 फीसदी तक भर चुका था। नीली रोशनी में नहाया स्टेडियम मनोरम लग रहा था। विशालकाय टीवी स्क्रीन पर जब भी किसी वीआईपी को दिखाया जाता, तब-तब लोगों का नाद सुनाई देता।
6.50 बजे : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पहुंचे। इनके पीछे ही अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जैक रॉग और भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष तथा आईओए के उपाध्यक्ष रणधीर सिंह पहुंचे। साथ में न्यूजीलैंड के गर्वनर जनरल सर आनंग सत्यानंद थे।
लोकसभा अध्क्ष मीरा कुमार, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कपाड़िया, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 6.51 पर स्टेडियम पहुंचे।
7.00 बजते ही स्टेडियम नीली रोशनी से नहा उठा। चारो ओर कैमरों के फ्लश की लाइट चमक उठा। 7.00 बजे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर का आगमन।
इसी वक्त ब्रिटेन के शाही घराने का राजकुमार चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला का आगमन। साथ ही में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील।
राष्ट्रपति के आगमन के बाद राष्ट्र गान बजाया गया, जिसे पूरे स्टेडियम ने खड़े होकर सम्मान दिया। इसके बाद स्टेडियम लोगों की हुंकार से गूंज उठा।
उल्टी गिनती के साथ आतिशबाजी शुरू :
इसके बाद उल्टी गिनती शुरू हुई। 5..4.3.2.1.0 और फिर, जोर की ध्वनि और स्टेडियम अपने सबसे सुंदर रूप में दिखने लगा। एरेस्टेट के अंदर रोशनी थी और स्टेडियम के बुर्ज पर आतिशबाजी हो रही थी। आतिशबाजी इतनी शानदार की स्वर्ग की सुंदरता भी कम पड़ जाए।
पूरा स्टेडियम उल्लासित था। नजारा इतना खास था कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था। एरोस्टेट धीरे-धीरे ऊपर जाना शुरू कर दिया। उसमें स्टेडियम के अंदर जारी कार्यक्रम की छवि नजर आने लगी। यह नजारा पहली बार भारत में दिखा। सचमुच अद्वीतीय।
रिद्म आफ इंडिया ने मन मोहा :
एरोस्टेट के नीचे पुतले लटक रहे थे। ऐसा लग रहा था कि मानो वे हवा के साथ अठखेलियां कर रहे हों। इसके बाद फोकर् ड्रम्स ऑफ इंडिया का प्रदर्शन। इसे रिदम आफ इंडिया नाम दिया गया। इसके साथ सुंदर पोशाक में नृतकों ने मनमोह लेने वाला नृत्य किया। पुंचकोलोम (मणिपुर) के नगाड़ों ने लोगों का मन मोह लिया।
स्ेटडियम के बीच में बने मंच पर नन्हा केशव अपनी तबले की धुनों से सबका मन मोह रहा था। केशव देखने में उस्ताद जाहिर हुसैन की तरह लगता था। केशव के जीवन के ये सबसे अनमोल पल थे क्योंकि पूरी दुनिया ने उसे लगभग पांच मिनट तक देखा।
इसके बाद भारयीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इनक्रेडिबल इंडिया पर छोटी सी फिल्म दिखाई गई। इसे लोगों ने खूब स्राहा। इसे बड़े रोचक अंदाज में पेश किया गया।
सफेद चादर पर हथेलियां :
अब बारी मशहूर गायक हरिहरण और भारत के विभिन्न स्कूलों को बच्चों द्वारा गाए गए स्वागतम गीत की बारी थी। इस गीत के माध्यम से विदेशी मेहमानों का भारत में स्वागत किया गया। यह नजारा शानदार था। इसमें विभिन्न स्कूलों के 1050 बच्चों ने हिस्सा लिया। इरोस्टेट पर इस गीत के माध्यम से विदेशी महमानों का सभी 23 भारतीय भाषाओं में स्वागत किया गया। 'केसरिया बालम.आओ नी पधारो मारे देस..'।
इसके बाद बच्चों ने सफेद चादरों पर लाल रंग द्वारा हथेलियां उकेरीं और वह भी स्टेडियम के मध्य में। इस नजारे को भुलाया जाना मुश्किल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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