राष्ट्रमंडल खेल (हॉकी): फाइनल के लिए दिखाना होगा दम
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान को हराकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। अब उसका सामना मंगलवार शाम मेजर ध्यान चंद स्टेडियम में इंग्लैंड के साथ होना है। यह मैच भारत के लिए बेहद खास है क्योंकि वह पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में पहुंचने के लिए प्रयासरत है।
पुरुष टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी क्षमता के साथ न्याय नहीं किया है। 1998 में हॉकी को पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में जगह मिली, उसके बाद से भारतीय टीम तीसरी बार इन खेलों में हिस्सा ले रही है। 1998 में कुआलालम्पुर में उसे चौथा स्थान मिला था जबकि उसने 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलो में हिस्सा नहीं लिया था। 2006 में मेलबर्न मे आयोजित पिछले संस्करण में भारतीय टीम निराशाजनक तौर पर छठे स्थान पर रही थी।
रविवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर मिली 7-4 की जीत ने भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। करो या मरो के उस मैच में भारत्ीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन निसंदेह बेहद उम्दा रहा था लेकिन इस प्रदर्शन को आगे के मैचों में भी जारी रखने की जरूरत है।
इसके लिए अनुशासन की सबसे अधिक जरूरत होती है। टीम को अपने मन से यह बात निकाल देनी चाहिए कि उसने अपने पिछले मैच में बड़ी जीत हासिल की है। हर मैच में नया किस्सा लिखा जाता है और लिहाज से भारतीय खिलाड़ियों को नए सिरे से प्रयास करना होगा।
पाकिस्तान के साथ खेले गए मैच से एक अच्छी बात यह सामने आई कि अहम मुकाबलों में खिलाड़ियों में तालमेल की कोई कमी नहीं रहती लेकिन एक खराब बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 11 पेनाल्टी कार्नर हासिल परंतु उसमें से सिर्फ तीन को गोल में तब्दील कर सके।पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलने का यह औसत अहम मुकाबलों में महंगा पड़ सकता है।
भारतीय टीम का अब तक का सफर अच्छा नहीं रहा है। पहले मैच में मलेशिया के खिलाफ उससे बड़ी जीत की उम्मीद थी लेकिन कड़े संघर्ष के बाद उसे 3-2 से जीत मिल सकी। मलेशिया के खिलाफ टीम के खेल में कई तरह की खामियां थीं और उन्हीं का खामियाजा टीम को आस्ट्रेलिया के खिलाफ भुगतना पड़ा, जहां उसे 2-5 से करारी शिकस्त मिली।
इसके बाद भारत ने पूल-ए की सबसे कमजोर टीम स्कॉटलैंड को 4-0 से पराजित किया। पाकिस्तान को हराकर भारतीय खिलाड़ियों ने बेशक अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है लेकिन इस उम्मीद को पदक में बदलने के लिए उसे अभी और दो मैच जीतने हैं। इंग्लैंड उसके सामने पहला रोड़ा है और बहुत संभव है कि फाइनल में उसका सामना आस्ट्रेलिाय से हो, जो मंगलवार को ही न्यूजीलैंड के साथ भिड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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