राष्ट्रमंडल खेल (हॉकी) : पहली बार फाइनल में पहुंचा भारत (लीड-2)
निर्धारित समय की समाप्ति तक दोनों टीमें 3-3 से बराबरी थीं। 15 मिनट के अतिरिक्त समय में भी कोई गोल नहीं हो सका। इसके बाद मैच का फैसला शूटआउट के जरिए हुआ। समापन वाले दिन 14 अक्टूबर को होने वाले खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम का सामना तीन बार के चैम्पियन आस्ट्रेलिया के साथ होगा।
यह मैच उम्मीद के मुताबिक रोमांचक रहा। एक तरफ यूरोपीयन शैली से विपक्षी टीम को चकमा देने वाली इंग्लैंड की टीम थी और दूसरी ओर मिश्रित शैली अपना चुकी भारतीय टीम। इस टूर्नामेंट में हालांकि इंग्लैंड का प्रदर्शन बेहतर रहा क्योंकि वह पूल-बी में टॉप पर रही थी। इसके बावजूद भारतीय टीम से बेहतर प्रदर्शन की आस की जा रही थी क्योंकि वह अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही थी और पिछले मैच में पाकिस्तान को हराने के बाद उसका मनोबल सातवें आसमान पर था।
शुरुआती पलों में तो दोनों टीमों ने एक दूसरे को आंकने की रणनीति अपनाई। भारत इसमें आगे रहा और उसे 20वें मिनट में पहला पेनाल्टी कार्नर मिला। तय रणनीति के तहत पेनाल्टी कार्नर पर सीधा हिट नहीं किया जाना था। भारत का यह प्रयास बेकार गया लेकिन गेंद के रिबाउंड होने के बाद सरवनजीत ने गेंद को गोल पोस्ट के बाएं कोने में डालकर टीम को पहली सफलता दिलाई। इस सफलता पर दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने लायक थी।
इसके एक मिनट बाद ही इंग्लैंड को बराबरी करने का एक शानदार मौका मिला लेकिन रॉब मूर के एक सीधे पास पर रिचड मेंटाल को बस स्टिक लगानी थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके। भारतीय रक्षापंक्ति को इस मैच में पहली बड़ी सबक मिली।
इस मुसीबत के टलने के बाद भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खेमे में एक बड़ा हमला किया। दानिश मुज्तबा ने लगभग चार खिलाड़ियों को छकाते हुए एक शानदार पास शिवेंद्र को दिया लेकिन शिवेंद्र इस मौके को भुना नहीं सके।
दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। नारे सुनाई दे रहे थे। खासतौर पर इंडिया जीतेगा-इंडिया जीतेगा का नारा पूरे वातावरण में गूंज रहा था। मध्यांतर करीब आ रहा था। इंग्लैंड का प्रयास जहां बराबरी करने का था वहीं भारतीय खिलाड़ी इस बढ़त को और मजबूत करना चाहते थे। कुल मिलाकर पहले हॉफ में दोनों टीमों के बीच अच्छी हॉकी देखने को मिली।
इसी क्रम में इंग्लैंड ने 35वें मिनट में अपना पहला पेनाल्टी कार्नर हासिल किया। अब तक किए गए गई हमलों मे नाकामी झेलने वाली इंग्लिश टीम के पास बराबरी करने का शानदार मौका था। इस मौके को इंग्लैंड टीम ने हाथ से जाने नहीं दिया और ड्रेग फ्लिकर एश्ले जैक्सन के पहले प्रयास के बाद रिचड मेन्टाल ने ड्रैग फ्लिक किया और अपनी टीम को 1-1 की बराबरी दिलाने में सफल रहे। इसी के साथ इस मैच का मध्यांतर हुआ।
मध्यांतर के बाद खेल शुरू हुआ और 40वें मिनट में सरदार सिंह को गलत तरीके से विपक्षी खिलाड़ी को रोकने के प्रयास में हरा कार्ड दिखाया गया। इसके एक मिनट बाद ही इंग्लैंड को दूसरा पेनाल्टी कार्नर मिला। इस पर इंग्लैंड के खिलाड़ियों में जोश आ गया। उन्होंने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और जैक्सन ने इस मैच में अपना दूसरा गोल करके अपनी टीम को 2-1 से आगे कर दिया।
ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम भारतीयों की रणनीति समझ गई है। इसी का नतीजा था कि इंग्लैंड ने 45वें मिनट में अपना तीसरा पेनाल्टी कार्नर हासिल किया। इंग्लैंड को यह पेनाल्टी कार्नर प्रबोध टिर्की के गलत खेल के कोरण मिला। इंग्लैंड ने इस प्रयास को बेकार नहीं जाने दिया और सटीक रणनीति के कोरण वह गोल करने में सफल रही। इंग्लैंड के लिए यह गोल मेन्टाल ने किया। इंग्लिश टीम अब 3-1 से आगे हो चुकी थी।
इंग्लैंड की टीम का लगातार हमला जारी रहा। 47वें मिनट में उसे चौथा पेनाल्टी कार्नर हासिल हुआ। भारतीय रक्षापंक्ति ने बेहतर तालमेल के कोरण हालांकि उसका यह प्रयास बेकार कर दिया लेकिन इसके बावजूद टीम पर हार का संकट बना रहा।
52वें मिनट में भारत के लिए संकट और बड़ा होता दिखा। टिन्डाल को ऐसे समय में एक लम्बा पास प्राप्त हुआ, जब डिफेंस लाइन में गोलकीपर को छोड़कर सिर्फ संदीप सिंह मौजूद थे। टिन्डाल ने एक जोरदार प्रयास किया और गेंद को भरत चेतरी की ओर भेजा लेकिन चेतरी ने शानदार चपलता के साथ इंग्लैंड का यह प्रयास बेकार कर दिया।
इसके बाद भारत ने चढ़कर खेलने का फैसला किया। नतीजा हुआ कि भारत को 54वें मिनट में दूसरा पेनाल्टी कार्नर मिला। उसका यह प्रयास हालांकि बेकार चला गया क्योंकि संदीप का ड्रैग गोलपोस्ट से कोफी दूर से निकल गया।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार जोरदार मैदानी हमला किया। 56वें मिनट में संदीप के एक लम्बे पास पर विक्रम पिल्ले ने डिफ्लेक्ट किया और गेंद इंग्लैंड के गोलपोस्ट में घुस गई। स्कोर 2-3 हो चुका था। यह अब तक का सबसे तेज मैदानी गोल था। इस गोल पर दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने लायक थी।
इसके बाद तो मानों भारत ने अपने हमले का पैनापन बढ़ा दिया। 60वें मिनट में भारत ने एक जोरदार हमला किया। उसका यह प्रयास सफल रहा। स्कोर 3-3 हो चुका था। यह गोल सरवनजीत के खाते में गया। इस मैच में यह उनका दूसरा गोल था। दर्शकों की गर्जना देखने लायक थी। पूरा स्टेडियम इतना उत्साहित था कि मानों भारत ने विश्व खिताब जीत लिया हो। हॉकी के प्रति देशवासियों की दीवानगी कोबिलेतारीफ है।
भारतीय टीम हर हाल में यह मैच जीतना चाहती थी और यही कारण था कि उसने अगले 10 मिनट में इंग्लैंड के गोलपोस्ट पर कम से कम चार जोरदार हमले किए लेकिन उसका एक भी प्रयास सफल नहीं हो सका। दर्शकों को इससे कोफी निराशा हुई लेकिन खेल का रोमांच बढ़ता ही गया। निर्धारित समय की समाप्ति तक दोनों टीमों का स्कोर 3-3 रहा। अब मैच का फैसला अतिरिक्त समय में होना था।
अगले साढ़े सात मिनट में जो टीम पहले गोल करती, जीत उसी की होती। अतिरिक्त समय का दूसरा हाफ खत्म होने पर भी दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं। स्कोर 3-3 ही बना रहा। हालांकि इस हॉफ के अंतिम मिनट में भारत ने अपना चौथा पेनाल्टी कार्नर हासिल किया। इस पर उम्मीद की किरण जगी लेकिन भारतीय खिलाड़ी इस उम्मीद को गोल में नहीं बदल सके।
अतिरिक्त समय के दूसरे हॉफ में भी कोई गोल नहीं हो सका। हालांकि इस हाफ में भारतीय खिलाड़ियों को दो बार मैदानी गोल करने का मौका मिला लेकिन वे इस मौकों को भुना नहीं सके। दोनों ही मौकों पर इंग्लैंड के गोलकीप फ्लेयर जेम्स ने उन्हें निराश किया। अब मैच का फैसला पेनाल्टी स्ट्रोक के जरिए होना था। इसके अंतर्गत एक टीम के पांच मौका मिला।
इंग्लैंड की पहला मौका रिचर्ड स्मिथ को मिला, जो भारतीय गोलकीपर को छकाने में सफल रहे। इंग्लैंड 1-0 से आगे। भारत की ओर से पहले प्रयास में सरवनजीत ने गोल किया। भारत ने 1-1 से बराबरी की। इंग्लैंड के लिए दूसरा प्रयास मेन्टाल ने किया और वह सफल रहे। इंग्लैंड 2-1 से आगे। भारत की ओर से दूसरा प्रयास विक्रम ने किया। भारत ने 2-2 की बराबरी की। इंग्लैंड की ओर से तीसरा प्रयास ग्लेन किरखाम ने किया लेकिन वह नाकाम हो गए। स्कोर अब भी 2-2 था लेकिन इंग्लैंड का एक प्रयास कम हो चुका था।
भारत की ओर से तीसरा प्रयास संदीप सिंह ने किया। संदीप गोल करने में सफल रहे। भारत 3-2 से आगे हो चुका था। इसके बाद इंग्लैंड की ओर से जैक्सन ने गोल किया। इंग्लैंड 3-3 से बराबरी करने में सफल। भारत की ओर से चौैथा प्रयास अर्जुन ने किया। अर्जुन इंग्लिश गोलकीपर को छकाने में सफल रहे। भारत 4-3 से आगे हो चुका था। इंग्लैंड की ओर से चौथा और आखिरी प्रयास मेन्टाल ने किया और वह गोल करने में सफल रहे। इस तरह इंग्लैंड स्कोर 4-4 से बराबर करने मे सफल रहा लेकिन भारत के पास अब भी एक प्रयास बाकी था।
मैदान में मौजूद 14000 दर्शकों का रोमांच देखने लायक था। हर ओर इंडिया जीतेगा-इंडिया जीतेगा का नारा गूंजायमान था। भारत के लिए अंतिम प्रयास करने शिवेंद्र सिंह पहुंचे और अपनी टीम के लिए गोल्डन गोल करके उन्होंने इतिहास रच दिया।
पूरा मैदान अपने पंजों पर आ चुका था। शोर इतना कि अपनी भी आवाज सुनना मुश्किल था। भारतीय खिलाड़ी मैदान के बीचों-बीच एक दूसरे पर लोट रहे थे। हर ओर जश्न का माहौल था। आखिरकार भारत ने अपनी तमाम नाकामियों को धोते हुए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में जगह बनाई है।
पाकिस्तान के साथ खेले गए ग्रुप-ए के अंतिम लीग मुकाबले में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पूरी तरह भरा हुआ था लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले के लिए अपेक्षाकृत कम संख्या में दर्शक मैदान में पहुंचे। उनके उत्साह में हालांकि कोई कमी नहीं थी। प्रत्येक उद्घोषणा के साथ दर्शक जोरदार गर्जना कर रहे थे। राष्ट्रगान के दौरान शुरुआत में थोड़ी कम उत्साह दिखी लेकिन राष्ट्रगान के खत्म होते-होते पूरा स्टेडियम इंडिया जीते-इंडिया जीतेगा, कम ऑन इंडिया, भारत माता की जय और इंडिया-इंडिया के नारों से गुंजायमान हो गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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