सौरव गांगुली की तरह शर्ट उतारकर जीत का जश्न मनाया कश्यप ने
ग्लास्गो। वर्ष 2002 में भारत और इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट सीरिज का फाइनल खेला गया था। इस मैच में भारत को जीत के लिए 326 रन बनाने थे और भारत ने आठ विकेट के नुकसान पर इस लक्ष्य को हासिल किया।
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर जब भारत ने फाइनल जीत ट्रॉफी अपने नाम की तो उस समय के भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने पैवेलियन में शर्ट उतारकर इस जीत का जश्न मनाया।
रविवार को ग्लास्गो में जब 27 वर्ष के पारुपल्ली कश्यप ने कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन में मेन्स फाइनल जीता तो उन्होंने भी कुछ इसी अंदाज में जीत का जश्न मनाया।
कश्यप की बदौलत भारत को 32 वर्ष के बाद बैडमिंटन में गोल्ड मेडल हासिल हो सका है। मौका खास था और कश्यप ने जिस अंदाज में जीत का जश्न मनाया, उससे यह और खास हो गया।
आप भी कश्यप के इस 'शर्टलेस सेलिब्रेशन' को कुछ तस्वीरों के जरिए देखें।

32 साल बाद हुआ कारनामा
27 वर्षीय पारुपल्ली कश्यप 32 वर्षों में भारत के पहले ऐसे पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है। उनकी इस महान जीत ने उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है।

इस बार मिली कामयाबी
कश्यप ने वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान एकल मुकाबले में कांस्य जीता था। इस बार उन्हें बड़ी कामयाबी हासिल हुई है।

वर्ष 2012 में मिला पुरस्कार
कश्यप को वर्ष 2012 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। फिलहाल उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 14 है और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनकी रैंकिंग में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।

प्रकाश पादुकोण से ली ट्रेनिंग
कश्यप हैदराबाद के रहने वाले हैं। उनके पिता की जॉब की वजह से उन्हें एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता था। वह कुछ दिनों तक बैंगलोर में रहे और यहां पर उन्होंने प्रकाश पादुकोण की एकेडमी में हिस्सा लिया।

आस्थमा के हो गए शिकार
वर्ष 2004 में कश्यप को आस्थमा पता चला। उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो चुका है लेकिन फिर उन्हें पुलेला गोपीचंद का साथ मिला। गोपीचंद ने उन्हें ट्रेनिंग दी और आज कश्यप भारत के विजेता बनकर उभरे हैं।
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