खेल. टेनिस हिंगिस चार अंतिम लंदन
कोर्ट की गरमी देह को भी पिघलाने लगी थी 1 उन्हें 2001 . 2002 और 2003 में टखने का आपरेशन कराना पडा1 पेशेवर टेनिस उनके बस का नहीं रह गया था और उन्होंने इससे विदाई लेने का फैसला कर लिया1 लेकिन जिसकी जीवन की डोर ही टेनिस से बंधी हो वह भला कितने दिनों तक कोर्ट से दूर रह सकता था1 वह 2005 में थाईलैंड में एक छोटे से टूर्नामेंट में उतरीं और इसके अगले साल टेनिस में पूरी तरह वापसी का एलान भी कर दिया1 लोगों ने सोचा कि मारिया शारापोवा . जस्टिन हेनिन और विलियम्स बहनों के पावरप्ले के सामने अब हिंगिस की कीमियागीरी कहां काम आएगी1 लेकिन वह आस्ट्रेलियन आेपन में क्वार्टरफाइनल तक पहुंच गइ और साल के अंत में विश्व रैंकिंग में छठे नंबर पर थीं1 मौजूदा साल टोक्यो में हिंगिस ने अपने कैरियर का 43 वां खिताब हासिल किया1 लेकिन चोट की वजह से वह फ्रेंच आेपन में हिस्सा नहीं ले सकीं और विंबलडन में उनका सितारा गर्दिश में रहा1 अपना आखिरी मैच उन्होंने पेइचिंग में सितंबर में खेला और चीन की शुआई पेंग से हार गइ1 हर खूबसूरत कहानी का अंत होता है मगर कैरियर की ढलान पर दामन में लगा कोकीन का धब्बा हिंगिस को हमेशा सालता रहेगा
पार्थिव उप्रेतीवीरेन्द्र1529रायटर
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