हॉकी टीम के कोच का इस्ताफा, गिल का विरोध
सेंटियागों, 10 मार्चः हॉकी ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में ग्रेट ब्रिटेन के हाथों भारत की 2-0 से करारी हार के बाद टीम के कोच जोआकिम कार्वाल्हो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कार्वाल्हो ने टीम की हार के बाद सैंटिएगो में कहा कि वह अपने सहायकों एम पी सिंह और रमेश परमेश्वरन के साथ इस्तीफा दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वह भारत वापसी के बाद गिल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे. भारतीय कोच ने टीम के चिली रवाना होने से पहले कहा था कि देश के क्वालिफाई नहीं करने की स्थिति में वह अपना पद छोड़ देंगे. उन्होंने कहा कि वह इस नाकामी की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए इस्तीफा दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य भारतीय हाकी प्रेमी की तरह वह भी इस नतीजे से निराश हैं. टीम को नए हौसले के साथ खड़े होकर फिर से अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में अपना पुराना रसूख पाने की कोशिश करनी होगी.
कार्वाल्हो ने कहा कि मौजूदा टीम में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ सीनियर खिलाडियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा. उन्होंने कहा कि इस पराजय के लिए भारतीय खिलाडी खुद ही जिम्मेदार हैं. वे समूचे मैच में काफी सुस्त रहे और पेनल्टी कार्नरों का फायदा नहीं उठा पाना भी भारी पड़ा.
भारत की इस नाकामी के बाद हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष के. पी. एस. गिल फिर से निशाने पर आ चुके हैं. गिल का चौतरफा विरोध शुरू हो चुका है. हार से खिन्न भारतीय हॉकी संघ के उपाध्यक्ष नरेंद्र बत्रा ने हॉकी की दुर्दशा के लिए फेडरेशन अध्यक्ष केपीएस गिल को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. बत्रा ने तो यहां तक कहा कि गिल को धक्के मारकर बाहर निकाल देना चाहिए.
बत्रा ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा आई एच एफ उपाध्यक्ष के ज्योति कुमारन को भेज दिया है. उन्होंने ओलंपिक में पहुंचने में भारत की नाकामी के लिए गिल की तानाशाही नीतियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि आई एच एफ मौजूदा पदाधिकारियों की राजनीति की भेंट चढ़ गया है.
महासंघ में कोई भी व्यक्ति किसी पद पर आठ साल से अधिक नहीं रह सकता मगर इस प्रावधान की सरासर अनदेखी की गई है. उन्होंने टीम के चयन में भी मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि आई एच एफ को इस शर्मनाक स्थिति से उबारने के लिए केन्द्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए.
पूर्व ओलंपियन गुरबख्श सिंह ने इसे भारतीय हाकी के लिए सबसे दुखद दिन बताया. उन्होंने कहा कि कार्वाल्हो ने सलाहकार रिक चाल्सवर्थ को दरकिनार करके भूल की. गुरबख्श ने कहा कि चाल्सवर्थ जैसे महारथी की सलाह भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती थीं.
उन्होंने संदीप सिंह और अर्जुन हलप्पा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को टीम में नहीं रखे जाने को भी गलत बताया.
उधर बनारस में मौजूद केपीएस गिल ने हॉकी के पिछड़ने की बात तो मानी लेकिन इस्तीफा देने की बात से साफ इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि टीम की वापसी पर वह इस बारे में बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह भारत वापसी के बाद गिल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे. भारतीय कोच ने टीम के चिली रवाना होने से पहले कहा था कि देश के क्वालिफाई नहीं करने की स्थिति में वह अपना पद छोड़ देंगे. उन्होंने कहा कि वह इस नाकामी की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए इस्तीफा दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य भारतीय हाकी प्रेमी की तरह वह भी इस नतीजे से निराश हैं. टीम को नए हौसले के साथ खड़े होकर फिर से अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में अपना पुराना रसूख पाने की कोशिश करनी होगी.
कार्वाल्हो ने कहा कि मौजूदा टीम में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ सीनियर खिलाडियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा. उन्होंने कहा कि इस पराजय के लिए भारतीय खिलाडी खुद ही जिम्मेदार हैं. वे समूचे मैच में काफी सुस्त रहे और पेनल्टी कार्नरों का फायदा नहीं उठा पाना भी भारी पड़ा.
भारत की इस नाकामी के बाद हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष के. पी. एस. गिल फिर से निशाने पर आ चुके हैं. गिल का चौतरफा विरोध शुरू हो चुका है. हार से खिन्न भारतीय हॉकी संघ के उपाध्यक्ष नरेंद्र बत्रा ने हॉकी की दुर्दशा के लिए फेडरेशन अध्यक्ष केपीएस गिल को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. बत्रा ने तो यहां तक कहा कि गिल को धक्के मारकर बाहर निकाल देना चाहिए.
बत्रा ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा आई एच एफ उपाध्यक्ष के ज्योति कुमारन को भेज दिया है. उन्होंने ओलंपिक में पहुंचने में भारत की नाकामी के लिए गिल की तानाशाही नीतियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि आई एच एफ मौजूदा पदाधिकारियों की राजनीति की भेंट चढ़ गया है.
महासंघ में कोई भी व्यक्ति किसी पद पर आठ साल से अधिक नहीं रह सकता मगर इस प्रावधान की सरासर अनदेखी की गई है. उन्होंने टीम के चयन में भी मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि आई एच एफ को इस शर्मनाक स्थिति से उबारने के लिए केन्द्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए.
पूर्व ओलंपियन गुरबख्श सिंह ने इसे भारतीय हाकी के लिए सबसे दुखद दिन बताया. उन्होंने कहा कि कार्वाल्हो ने सलाहकार रिक चाल्सवर्थ को दरकिनार करके भूल की. गुरबख्श ने कहा कि चाल्सवर्थ जैसे महारथी की सलाह भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती थीं.
उन्होंने संदीप सिंह और अर्जुन हलप्पा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को टीम में नहीं रखे जाने को भी गलत बताया.
उधर बनारस में मौजूद केपीएस गिल ने हॉकी के पिछड़ने की बात तो मानी लेकिन इस्तीफा देने की बात से साफ इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि टीम की वापसी पर वह इस बारे में बात करेंगे।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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