मानवाधिकार आईओसी के केंद्र में होना चाहिए : रोग्गे
ब्रसेल्स, 3 मई (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष जैक्स रोग्गे ने कहा कि भविष्य में मानवाधिकार आईओसी का केंद्रीय विषय होना चाहिए।
चीन द्वारा मार्च में तिब्बत में भड़के प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने पर रोग्गे ने शुक्रवार को कहा कि आईओसी को समाज में अपनी भूमिका पर पुन: विचार करना होगा।
उन्होंने कहा, "हम एक साथ गरीबी, प्राकृतिक आपदाओं, खेलों में महिलाओं के अधिकार और महामारियों की रोकथाम से जूझते हैं। यह काफी नहीं है। हमें अब अपनी संभावनाओं और सीमाओं को ध्यान में रखते हुए मानवाधिकारों की दिशा में भी सोचना होगा।"
दरअसल, 2001 में आईओसी द्वारा चीन को ओलंपिक के लिए चुने जाने के बाद से ही मानवाधिकार समूह इसका विरोध कर रहे हैं। हाल में चीन विरोधी प्रदर्शनों के बाद से हालात और विस्फोटक हो गए हैं।
रोग्गे ने कहा कि उन्होंने गत सात वर्षो में चीन के नेताओं के साथ मानवाधिकारों पर काफी बात की है।
उन्होंने बताया कि यदि वह अपनी बातचीत के विषय पर सार्वजनिक बयान देते तो उससे वह बेशक पश्चिमी जगत के नायक साबित होते, लेकिन ओलंपिक को भारी नुकसान पहुंचता इसीलिए उन्होंने खामोशी की नीति अपनाए रखी।
उन्होंने माना कि गत माह ओलंपिक मशाल विरोधी प्रदर्शन एक "संकट काल" था। आईओसी के लिए भी यह प्रतिष्ठा का प्रश्न था।
उन्होंने कहा कि आईओसी चार्टर के अनुसार खेल के समय किसी भी किस्म का राजनीतिक विरोध जताने वाले खिलाड़ियों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
रोग्गे के अनुसार, "हालात देखते हुए लगता है कि खेलों का बेहतरीन आयोजन किया जाएगा। काफी समय बाद ऐसा हुआ है कि खेलों के सभी स्थल तैयार हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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