बिलियर्ड्स की दुनिया में भारत का वर्चस्व

By Staff
नई दिल्ली, 11 सितम्बर: हमवतन देवेंद्र जोशी को हराकर भारत के पंकज आडवाणी ने बुधवार को बेंगलुरू में अंतर्राष्ट्रीय बिलियर्ड्स एवं स्नूकर महासंघ (आईबीएसएफ) विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप (समय आधारित) जीतकर दोहरी सफलता हासिल की।

पंकज ने कुछ दिन पहले बेंगलुरू में ही भारत के पूर्व विश्व चैंपियन गीत सेठी को हराकर विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप (अंक आधारित) का खिताब जीता था। इस तरह पंकज ने बिलियड्स की दुनिया में भारत का वर्चस्व कायम कर दिया है।

वर्ष 2005 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान 'राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान' से नवाजे जा चुके पंकज यह खिताब जीतने वाले सातवें भारतीय हैं। पंकज से पहले विल्सन जोंस, माइकल फरेरा, अशोक शांडिल्य, गीत सेठी, रूपेश शाह और मनोज कोठारी यह खिताब जीत चुके हैं।

वर्ष 1958 में कोलकाता में इंग्लैंड के लेजली ड्रिफील्ड को हराकर पहली बार देश के लिए बिलियर्ड्स का विश्व खिताब जीतने वाले जोंस ने जिस सफर की शुरुआत की थी, अपनी दोहरी कामयाबी के दम पर पंकज उसे पर मंजिल तक ले आए हैं।

जोंस के बाद फरेरा और गीत ने बिलियर्ड्स की दुनिया में भारत का झंडा बुलंद रखा, लेकिन वर्ष 2005 में पहली बार विश्व चैंपियन बनने वाले पंकज इस खेल के बेताज बादशाह के रूप में उभरे हैं। 23 वर्ष की छोटी सी उम्र में वे चार बार विश्व खिताब जीत चुके हैं।

जोंस ने जहां 1958 और 1964 में विश्व खिताब जीता था, वहीं वे 1962 में उपविजेता रहे थे। इसके बाद फरेरा ने भारत की कमान संभाली और तीन बार (1977,1981,1983) में विजेता रहे। फरेरा 1975 में उपविजेता भी रहे थे।

वर्ष 1973 में एक अन्य भारतीय सतीश मोहन इस परिदृश्य में आए थे, लेकिन उन्हें उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा था। फरेरा के बाद गीत, कोठारी और शांडिल्य ने अपनी प्रतिभा के दम पर भारत का नाम बुलंद किया।

गीत ने 1985, 1987 और 2001 में विश्व खिताब जीता था। यही नहीं वे 2002, 2003, 2005 में तीन बार उपविजेता भी रहे थे। कोठारी ने 1990 में शांडिल्य को हराकर खिताब जीता था, जबकि शांडिल्य 2002 में चैंपियन बने थे। शांडिल्य 1990, 1997, 2001, 2007 में चार बार उपविजेता रह चुके हैं।

पंकज ने 2005 में मॉल्टा में अपना पहला खिताब जीता था। इसके बाद 2007 में रूपेश शाह ने खिताब जीता। रूपेश ने शांडिल्य को हराया था। इसी वर्ष पंकज ने भारत के ध्रुव सितवाला को हराकर सिंगापुर में खिताब जीता था।

वर्ष 1926 में पहली बार आयोजित विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप के शुरुआती चरण में इंग्लैंड, वेल्स और आस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों का वर्चस्व रहा था, लेकिन 1958 के बाद से भारतीयों ने उनकी जगह ले ली।

जोंस की पहली सफलता के बाद से भारत ने कुल 14 बार यह खिताब जीता है, जबकि 15 मौकों पर उसके खिलाड़ी उपविजेता रहे हैं। इसी से साफ है कि कभी पश्चिमी देशों का खेल कहे जाने वाले बिलियर्ड्स में आज भारत का वर्चस्व कायम हो चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Thursday, September 11, 2008, 13:55 [IST]
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