टेस्ट मैचों पर पड़ी ट्वेंटी-20 की मार

By Staff
नई दिल्ली, 23 अक्‍तूबर: क्रिकेट के सबसे नए स्वरूप ट्वेंटी-20 के उदय के साथ एक सवाल सबको परेशान करने लगा था। यह सवाल था- क्या ट्वेंटी-20 की लोकप्रियता के आगे टेस्ट और एकदिवसीय मैच टिक पाएंगे?

इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) और फिर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के क्रांतिकारी उद्भव के साथ यह सवाल और भी परेशान करने लगा। दुनिया भर के क्रिकेट प्रशासकों ने इसे लेकर अपनी-अपनी दलीलें दीं लेकिन किसी का आकलन इस क्रम में फिट नहीं बैठा। दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले ट्वेंटी-20 विश्व कप की शानदार कामयाबी ने तो प्रशासकों को और भी चकरा दिया।

इसके बाद आईपीएल के पहले संस्करण की अपार सफलता ने क्रिकेट की लोकप्रियता के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। इसी के साथ द्विपक्षीय श्रंखलाओं में ट्वेंटी-20 मैच को नियमित रूप से शामिल किया जाने लगा। अपने सफर के तीन वर्षो के भीतर ट्वेंटी-20 क्रिकेट ने एकदिवसीय और खासकर टेस्ट क्रिकेट को संक्रमण काल में ढकेल दिया है।

इसका सबसे पहला और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच अगले वर्ष खेली जाने वाली टेस्ट श्रंखला है। इस श्रंखला पर आईपीएल या फिर यूं कहें कि ट्वेंटी-20 की मार पड़ती दिख रही है। इससे बचने के लिए इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को आरक्षित टीम के तौर पर अपने यहां खेलने के लिए राजी कर लिया है।

ब्रिटेन के समाचार पत्र 'दी टेलीग्राफ' के मुताबिक इंग्लैंड व वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) को श्रीलंका के साथ होने वाली टेस्ट श्रंखला के आयोजन के कम आसार दिख रहे हैं क्योंकि श्रीलंका के 13 बड़े खिलाड़ी खिलाड़ी उस वक्त (अगले वर्ष अप्रैल-मई) आईपीएल के साथ अपनी प्रतिबद्धता का निर्वाह कर रहे होंगे।

श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) ने हालांकि इंग्लैंड को भरोसा दिलाया है कि वह एक दोयम दर्जे की टीम इंग्लैंड भेजेगा लेकिन ईसीबी ऐसी किसी टीम के साथ खेलने के लिए तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में जाहिर तौर पर इस श्रंखला का रद्द होना तय है।

आईपीएल की शुरुआत के साथ इंग्लैंड में भी खिलाड़ियों अपने हित (कमाई) को लेकर आवाज उठाई थी। आईपीएल के पहले संस्करण में इंग्लैंड का कोई भी खिलाड़ी नहीं खेला था क्योंकि ईसीबी ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। कई खिलाड़ियों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की थी लेकिन देशहित का हवाला देकर उसे दबा दिया गया था।

इस वर्ष भी इस तरह की बातें सुनने में आ रही हैं। केविन पीटरसन और एंड्रयू फ्लिंटॉफ सरीखे इंग्लैंड के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल किए जाने की चर्चा जोरों पर हैं। कुछ दिन पहले समाचार पत्र 'टाइम्स' ने इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। आईपीएल के अध्यक्ष ललित मोदी की इस संबंध में ईसीबी अधिकारियों से बात भी हुई थी लेकिन उसका कोई पुष्ट नतीजा नहीं निकल सका है।

टेस्ट मैचों पर ट्वेंटी-20 की लोकप्रियता की मार पड़नी शुरू हो चुकी है। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मोहाली में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारुन लोर्गाट ने भी टेस्ट मैचों में कम होती दर्शकों की संख्या पर चिंता जताई थी। यह चिंता सिर्फ लोरगार्ट की ही नहीं है। क्रिकेट खेलने वाले उन तमाम देशों के लिए यह एक बड़ी चुनौैती के रूप में उभरा है।

इसे सीधे तौर पर ट्वेंटी-20 की लोकप्रियता से जोड़ा जाए तो गलत नहीं होगा क्योंकि दर्शक अब पांच दिनों या आठ घंटे के लिए स्टेडियम का रुख करने की बजाय तीन घंटे के मुकाबले पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जहां रन, रोमांच और रंगीनी का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Thursday, October 23, 2008, 15:32 [IST]
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