दलीप ट्रॉफी : 12वीं बार चैम्पियन बना दक्षिण क्षेत्र (राउंडअप)
यह जीत दक्षिण क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए बेहद खास है क्योंकि उनके शानदार खेल की बदौलत दक्षिण 15 वर्ष के अंतराल के बाद फिर से चैम्पियन बना है। दक्षिण क्षेत्र इससे पहले 1995-96 सत्र में चैम्पियन बना था।
वाईएस राजशेखर रेड्डी क्रिकेट स्टेडियम पर खेले गए फाइनल मुकाबले में चौथे दिन शनिवार को उत्तर क्षेत्र की ओर से रखे गए 178 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण क्षेत्र की टीम ने 23.4 ओवरों में तीन विकेट के नुकसान पर मैच जीत लिया।
उत्तर क्षेत्र ने पहली पारी में 337 रन बनाए थे जिसमें पारस डोगरा के 167 रन शामिल थे जबकि उसकी दूसरी पारी 317 रनों पर सिमट गई थी। दक्षिण क्षेत्र ने अपनी पहली पारी में 477 रन बनाए थे और 140 रनों की बढ़त हासिल की। दक्षिण क्षेत्र की ओर से पहली पारी में कप्तान बद्रीनाथ ने 136, मनीष पांडेय ने 74 और रॉबिन उथप्पा ने 66 रन बनाए थे।
लक्ष्य हासिल करने उतरी दक्षिण क्षेत्र की ओर से मुकुंद और उथप्पा ने पहले विकेट के लिए 100 रनों की साझेदारी कर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। मुकुंद ने 67 गेंदों पर आठ चौके और एक छक्का लगाया जबकि उथप्पा ने 45 गेंदों पर आठ चौके और तीन छक्के लगाए।
उथप्पा को सुमित नरवाल ने स्थापन्न खिलाड़ी सारुल कंवर के हाथों लपकवाया। अमित वर्मा बिना खाता खोले यशपाल सिंह की गेंद पर उन्हीं को कैच थमाकर चलते बने। पांडेय तेज गति से रन बनाने के चक्कर में यशपाल की गेंद पर बोल्ड हो गए।
पांडेय ने 24 गेंदों पर दो चौकों और तीन छक्कों की मदद से 37 रन बनाए। पांडेय ने मुकुंद के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 66 रन जोड़े। उत्तर क्षेत्र की ओर से यशपाल ने सर्वाधिक दो विकेट झटके जबकि नरवाल के खाते में एक विकेट गया।
उत्तर क्षेत्र की ओर से चौथे दिन की शुरुआत शुक्रवार के नाबाद लौटे बल्लेबाज (नितिन सैनी 21) और मनदीप सिंह (9) ने की। उत्तर क्षेत्र ने तीसरे दिन एक विकेट के नुकसान पर 50 रन बनाए थे।
उत्तर क्षेत्र की ओर से दूसरी पारी में मिथुन मन्हास ने सर्वाधिक 79 रन बनाए जबकि नितिन सैनी ने 65 रनों का योगदान दिया। इसके अलावा, डोगरा 44, यशपाल नाबाद 42, कप्तान अमित मिश्रा 30, मनदीप सिंह 22 और शिखर धवन ने 19 रन बनाए।
बोडापती सुमंत दो रन बनाकर नाबाद लौटे। दक्षिण क्षेत्र की ओर से अभिमन्यु मिथुन, प्रज्ञान ओझा और श्रीनाथ अरविंद ने तीन-तीन विकेट झटके जबकि एक विकेट मुकुंद के खाते में गया।
दक्षिण क्षेत्र को खिताबी जीत दिलाने में अपने शानदार शतक की बदौलत अहम भूमिका निभाने वाले बद्रीनाथ को मैन ऑफ द मैच चुना गया। बद्रीनाथ दक्षिण के 12वें ऐसे कप्तान हैं, जिन्हें ट्रॉफी के साथ जश्न मनाने का मौका मिला है।
दक्षिण की टीम को पहली बार तब चैम्पियन बनने का मौका मिला था, जब 1962-63 सत्र में पश्चिम क्षेत्र के साथ उसका खिताबी मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ था। बारिश से बाधित इस मैच में दोनों टीमों को संयुक्त विजेजा घोषित किया गया था।
इसके बाद दक्षिण क्षेत्र ने 1965, 66 और 67 में लगातार तीन बार इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाकर पहली खिताबी हैट्रिक बनाई। इसके बाद वह फिर 1970 में चैम्पियन बना। इसके बाद चैम्पियन बनने के लिए उसे 1974 तक इंतजार करना पड़ा।
इस सफलता से प्रेरित होकर दक्षिण क्षेत्र ने 1975 में दोबारा इस खिताब पर कब्जा किया लेकिन इसके बाद वह लय से भटक गई। अगली खिताबी जीत उसे नौै वर्ष बाद 1984 में मिली। इसके बाद 1985 में एक बार फिर उसके हाथ से ट्रॉफी फिसल गई लेकिन 1986 में उसने फिर से इस पर कब्जा कर लिया।
इसके बाद दक्षिण को ट्रॉफी हासिल करने के लिए तीन वर्ष इंतजार करना पड़ा। उसने 1989 में इसे फिर से हासिल किया। 1995-96 में इसे एक बार फिर खिताबी जीत मिली लेकिन इसके बाद मानों उस इस ट्रॉफी को जीतने के लिए सहारा रेगिस्तान जैसा सूखा पार करना पड़ा। अब जाकर 15 वर्ष के बाद इसने फिर से चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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