प्रवीण की गैरमौजूदगी में जहीर की जिम्मेदारी बढ़ी
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। पारंपरिक स्विंग कला में माहिर उत्तर प्रदेश के गेंदबाज प्रवीण कुमार के चोट के कारण विश्व कप से बाहर होने से अनुभवी जहीर खान की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।
घरेलू और उपमहाद्वीप की पिचों पर प्रवीण की गेंदबाजी स्तरीय नहीं रही है लेकिन शुरुआती ओवरों में विकेट चटकाने के अपने नैसर्गिक गुण के कारण वह विश्व कप टीम में जगह बनाने में सफल रहे थे।
प्रवीण ने भारत में अब तक खेले गए 14 एकदिवसीय मैचों में सिर्फ नौ विकेट लिए हैं लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर उनके खाते में 34 मैचों में 48 विकेट दर्ज हैं। इसी कारण वह विदेशी दौरों पर चयनकर्ताओं की स्वाभाविक पसंद रहे हैं।
प्रवीण के स्थान पर शांताकुमारन श्रीसंत को टीम में शामिल किया गया है लेकिन इससे जहीर को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। जहीर को शुरुआती ओवरों में विपक्षी टीम के अधिक से अधिक विकेट झटकने की अपनी रणनीति में कुछ बदलाव करना होगा क्योंकि श्रीसंत विशेषज्ञ एकदिवसीय गेंदबाज के तौर पर नहीं जाने जाते।
पांच वर्ष पहले अपना पहला एकदिवसीय मैच खेलने वाले श्रीसंत को मुख्य तौर पर टेस्ट गेंदबाज माना जाता है। भारतीय चयनकर्ताओं के पास श्रीसंत को टीम में शामिल करने के अलावा और कोई चारा नहीं था क्योंकि वह विश्व कप की संभावित टीम में शामिल एकमात्र ऐसा अनुभवी तेज गेंदबाज थे, जिन्हें 15 सदस्यीय टीम में जगह नहीं मिली थी।
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने प्रवीण को लेकर अपनी रणनीति का हमेशा संभलकर प्रयोग किया है। धौनी ने उनसे शुरुआती चरण में अधिक से अधिक गेंदबाजी कराई है क्योंकि उस वक्त गेंद नई होती है और विकेट में भी थोड़ी नमी होती है। इसी का फायदा प्रवीण को मिलता रहा है लेकिन अब जबकि प्रवीण टीम में नहीं हैं, धौनी को दूसरे छोर पर जहीर के साथी के तौर पर आशीष नेहरा और श्रीसंत के रूप में किसी एक का चयन करना होगा।
प्रवीण की एक खासियत रही है। वह धीमी पिचों पर भी विकेट लेना जानते हैं लेकिन इसके बावजूद भारतीय पिचों पर उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्हें विश्व कप के लिए टीम में शामिल किया गया क्योंकि वह बीते कुछ वर्षो से एकदिवसीय टीम का अभिन्न अंग रहे हैं और अपनी गेंदों की विविधता के कारण हमेशा टीम के काम आते रहे हैं।
दूसरी ओर, श्रीसंत के टीम में लौटने से उसका आक्रामक पहलू मजबूत होगा लेकिन इसके कारण उसे मुश्किलों का भी सामना करना पड़ सकता है। दक्षिण अफ्रीका में खेली गई टेस्ट श्रृंखला के दौरान श्रीसंत को अपने रूखे व्यवहार के कारण कई बार चेतावनी मिली थी। इस तरह का व्यवहार विश्व कप जैसे आयोजन में स्वीकार्य नहीं है, लिहाजा धौनी को श्रीसंत को शांत रखने की एक अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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