विश्व कप में सबसे कमजोर टीमों में शुमार कनाडा की टीम अपना पहला मुकाबला श्रीलंका के हाथों 210 रनों से हार चुकी है जबकि आस्ट्रेलिया ने जिम्बाब्वे को 91 रनों से पराजित किया था।
जिम्बाब्वे की टीम को तेज शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी सलामी बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर और चार्ल्स कोवेन्ट्री के कंधों पर होगी जबकि मध्यक्रम में अनुभवी विकेट कीपर बल्लेबाज तातेंदा ताएबू, क्रेग इर्विन, रेगिस चाकाब्वा और सीन विलियम्स मजबूती प्रदान करेंगे।
कप्तान एल्टन चिगुम्बुरा निचले क्रम में आकर तेजी से रन बनाने के लिए जाने जाते हैं। तेज गेंदबाजी का आक्रमण अनुभवी प्रॉस्पर उत्सेया के साथ क्रिस मोफू सम्भालेंगे जबकि ग्रीम क्रेमर तीसरे तेज गेंदबाज की भूमिका निभाएंगे। स्पिन गेंदबाजी की जिम्मेदारी रे प्राइस के कंधों पर होगी।
कागजों पर देखा जाए तो कनाडा के आगे जिम्बाब्वे का पलड़ा भारी लगता है। जिम्बाब्वे की टीम में विपक्षी टीम से काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं जिसका फायदा जिम्बाब्वे को मिल सकता है।
कनाडा की टीम में सलामी बल्लेबाजी की भूमिका रुविन्दू गुणासेकरा और जॉन डेविसन निभाएंगे। डेविसन के नाम पिछले विश्व कप में सबसे तेज शतक लगाने का विश्व रिकॉर्ड है।
मध्यक्रम में जुबिन सरकारी, जिम्मी हंसरा, कप्तान अशीष बगाई और रिजवान चीमा टीम को मजबूती प्रदान करेंगे वहीं निचले क्रम में टायसन गोर्डन फिनिशर की भूमिका निभाएंगे। गेंदबाजी का आक्रमण खुर्रम चौहान, हरवीर वैदवान, बालाजी राव और हेनरी ओसिन्दे सम्भालेंगे।
कमजोर टीमों के लिए विश्व कप का प्रारूप कठिन माना जा रहा है। ऐसे में एक जीत इन टीमों के लिए आगे के मैचों में टॉनिक का काम करेगी।
देखना दिलचस्प होगा कि किस प्रकार ये दोनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।