दरअसल जकार्ता एशियाड में सेरेब्रल गेम्स (मानसिक खेल) की भी एंट्री हो रही है और उन्हीं में से ब्रिज एक है। इसमें दोनों टीमों से दो-दो खिलाड़ी होते हैं। इसे एशियाई खेलों में पहली बार शामिल किया गया है। वहीं बचपन से ही रीता को ताश खेलने का शौक रहा है। रीता साल 1970 से ही इस खेल में हिस्सा ले रही हैं और उन्होंने कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वह चीन, पाकिस्तान और अमेरिका में भी इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। रीता अपनी उम्र को लेकर बिलकुल भी चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा 'मैं खेलों के लिए उत्साहित हूं, जहां तक उम्र की बात है मैं खुद को बूढ़ा नहीं मानती। लोग अपने स्वास्थ्य के लिए दवाईयां लेते है मैं केवल योगा करती हूं। ब्रिज वैसे भी दिमाग का खेल हैं यहां उम्र कोई बाधा नहीं है। गोवा में ब्रिज फेडरेशन ऑफ इंडिया की कराई गई प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर उन्होंने चार लोगों की टीम में अपनी जगह पक्की की। बता दें कि रीता दिल्ली के खेलगांव इलाके में रहती हैं। ऐसे में देखना होगा कि आखिर रीता एशियन गेम्स में किस तरह धमाल मचाती हैं।