नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक भारत के लिए इस बार पिछले प्रदर्शन के मुताबिक काफी बेहतर रहा। नए खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। खासकर महिला हाॅकी टीम ने जिन्होंने अपने तीसरे ओलंपिक में अब तक का सबसे अच्छा खेल दिखाया। हालांकि वह सेमीफाइनल में हारकर मेडल जीतने से चूक गईं, लेकिन देश में उनकी प्रशंसा जारी है। इस बीच महिला गोल्फर अदिति अशोक ने भी धाक जमाई। साथ ही साबित किया कि गोल्फ में भी भारत दुनियाभर में अपना ढंका बजा सकता है। महज एक शाॅट के अंतर से 23 साल की अदिती ब्राॅन्ज मेडल जीतने से चूक गईं, लेकिन यह ओलंपिक में किसी महिला गोल्फर द्वारा अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। मेडल जीतने से चूकीं अदिति को हालांकि भरोसा है कि लोग उसके प्रदर्शन से खुश होंगे।
अदिति ने मैच के बाद कहा, ''अगर यह रिजल्ट किसी अन्य टूर्नामेंट में आता तो मैं इससे खुश रहती लेकिन ओलंपिक में मेडल के करीब आकर चाैथे नंबर पर रहते हुए खुश होना बेहद मुश्किल है। मुझे लगता है कि मैंने बेहतरीन खेल खेला है और अपना 100 फीसदी योगदान दिया।'' फाइनल राउंड में अदिती मेडल जीतने के करीब लग रहीं थी, लेकिन अंतिम समय वह पिछड़ गईं। अपने फाइनल राउंड को लेकर अदिति ने कहा, ''मैं बहुत सारे फेयरवे गंवा बैठी। फ्रंट-9 पर मैंने केवल हिट किया और बैक-9 पर जो लगता है कि मुझे 3 या 4 और हिट करने थे। दिन मेरे लिए सही नहीं था, जिसने मुझे मुकाबले से बाहर किया। मैं झंडे के करीब नहीं आस सकी।''
अदिति अशोक के प्रदर्शन की बदाैलत अब भारत में गोल्फ का भी खूब जिक्र हुआ। यह ऐसा खेल है जो भारत में क्रिकेट, हाॅकी, बैडमिंटन, कुश्ती से कई गुना पीछे है। हालांकि अब माना जा रहा है कि अदिति के प्रदर्शन से लोकप्रियता बढ़ेगी। इसको लेकर अदिति ने कहा, ''मैं चाहती थी कि मेडल जीतकर वापस जाऊं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैंने जो खेल दिखाया है उससे हर कोई अब भी खुश होगा। राउंड में उतरते समय मैंने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा था कि लोग मुझे टीवी पर देख रहे हैं या नहीं।'' गोल्फ की लोकप्रियता को लेकर उन्होंने कहा, ''अगर पोडियम फिनिश भी न हों तो ज्यादा से ज्यादा बार शीर्ष में रहकर खेल पूरा करने से शायद इस खेल को अधिक मदद मिलेगी। साथ ही ज्यादा बच्चे इसे खेलेंगे। इससे खेल को बढ़ने में मदद मिलेगी।