बीबीसी संवाददाता, ग्वांगजो से
चीनी खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रहा है. खेलों के दौरान एथलीट्स पूरी तरह खेल पर ध्यान लगा सकें इसलिए ज़रूरी होता है कि वहाँ मौजूद लोग मोबाइल फ़ोन बंद रखें. कम से कम शतरंज और निशानेबाज़ी जैसे खेलों में रेफ़री भी इस बात का ध्यान रखते हैं.
शतरंज में एक स्थानीय पत्रकार ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और गेम के दौरान ही उसका मोबाइल बज गया. बस फिर क्या था रेफ़री ने उसे खेल वाली जगह से बाहर किया और उसके ऊपर जुर्माना भी कर दिया गया. शतरंज में कोई भी खिलाड़ी समय से देर से नहीं आ सकता और मोबाइल फ़ोन की आवाज़ सभी को बंद रखनी होती है.
चीयर लीडर्स
जब इंडियन प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू हुआ तो लोगों को क्रिकेट के साथ ही चीयर गर्ल्स में भी काफ़ी रुचि थी. उनके छोटे कपड़ों पर विवाद भी काफ़ी हुआ था मगर वो लोकप्रिय इतनी हुईं कि उसके बाद इस साल की शुरुआत में जब दिल्ली में हॉकी का विश्व कप हुआ तो वहाँ भी चीयर लीडर्स बुलाई गईं. स्थानीय लोगों में इन खेलों को लेकर ख़ासा उत्साह है.
यहाँ हॉकी मैच में पहले हाफ़ के बाद जब ब्रेक हुआ तो मैदान पर कुछ लोग पहुँचे. उधर से घोषणा हुई कि अब आप लोग चीयर लीडर्स का स्वागत करिए. इधर उधर नज़र घुमाकर देखा तो भारत जैसी चीयर लीडर्स कहीं नहीं दिखीं. सामने आए हुए लोगों ने ही थोड़ी देर में डांस करना शुरू किया.
हॉकी के चीयर लीडर्स के इस दल में ज़्यादातर उम्र दराज़ लोग थे मगर लोगों का मनोरंजन करने का उनका जोश देखने लायक़ था. जब उनका कार्यक्रम ख़त्म हुआ तो लोगों ने उनका ताली बजाकर स्वागत भी किया.
हॉकी टीम की शॉपिंग
भारतीय हॉकी टीम ने बुधवार को बांग्लादेश को 9-0 से हराकर लगातार दूसरी बड़ी जीत दर्ज की थी. अब उनका अगला मैच पाकिस्तान के विरुद्ध शनिवार को है. इस बीच में दो दिन का समय मिलने से खिलाड़ियों ने थोड़ा बहुत समय घूमने में भी लगाया है. यहाँ के त्यान हा क्षेत्र में बने स्टेडियम में साइना नेहवाल का मैच काफ़ी देर रात रखा गया था तो अपना काम निबटाकर मैं कुछ खाने की तलाश में स्टेडियम से बाहर निकला.
शाकाहारी खाना ढूँढ़न में विफल रहने के बाद जब मैं कॉफ़ी लेकर अभी निकल ही रहा था कि कुछ भारतीय चेहरे सामने से भागते नज़र आए. देखा तो ये जाने-पहचाने चेहरे भारतीय हॉकी टीम के कुछ सदस्यों के थे, उनके हाथों में शॉपिंग के थैले थे और वे खेल गाँव लौटने के लिए अपनी बस पकड़ने के लिए भाग रहे थे. समय निकालकर शॉपिंग करना तो ठीक है मगर भारतीय खेल प्रेमी ये उम्मीद करेंगे कि वे ग्वांगजो से सिर्फ़ शॉपिंग बैग ही लेकर नहीं बल्कि मेडल भी लेकर लौटें.