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जब चीन में अनुवादक बनना पड़ा

By Staff
मुकेश शर्मा

बीबीसी संवाददाता, ग्वांगजो से

किसी भी एथलीट की जीत के बाद उसे संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करना होता है और आम तौर पर सवाल जवाब अँगरेज़ी और चीनी भाषा में होते हैं. तीन हज़ार मीटर स्टीपल चेज़ रेस जीतने के बाद जब सुधा सिंह संवाददाता सम्मेलन में पहुँचीं तो वह अँगरेज़ी उतनी अच्छी बोल नहीं सकती थीं और हिंदी किसी के समझ में आती नहीं थी.

संवाददाता सम्मेलन में मैं अकेला भारतीय पत्रकार बैठा था. जब सुधा से बोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने मेरी ओर देखा, मैंने उन्हें सुझाव दिया कि वो हिंदी में ही बोलें. अब जब वो हिंदी में बोलीं तो बाक़ी सब लोग इधर उधर ताकने लगे क्योंकि न तो हिंदी के अनुवादक की व्यवस्था की गई थी और न ही कोई और हिंदी समझ सकता था.

मुझसे सुधा की बात होते देख संवाददाता सम्मेलन आयोजित करने वाले मेरी ओर भागे और कहा कि आप उनकी बात का अनुवाद कर दीजिए. मैंने सुधा की बातों का स्थानीय पत्रकारों के लिए अनुवाद किया और सुधा के लिए भी हिंदी में बोलना सहज रहा. संवाददाता सम्मेलन समाप्त होने के बाद आयोजकों ने मुझे धन्यवाद दिया तो मैंने उन्हें सुझाव दिया कि भारतीय एथलीट्स के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए आयोजकों को अब हिंदी से चीनी में अनुवाद करने वालों की व्यवस्था भी करनी चाहिए.

पीटी उषा की बधाई

जब 10 हज़ार मीटर और तीन हज़ार मीटर में भारत को स्वर्ण मिला तो लंबी दूरी की दौड़ का अभ्यास कराने वाले भारतीय कोच निकोलाय बेहद ख़ुश थे.उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी सभी से बात की. सभी से बात करते-करते उनका फ़ोन बजा और उन्होंने फ़ोन उठाया तो उधर से पीटी उषा की आवाज़ थी.

दरअसल उड़न परी पीटी उषा भी यहाँ पर आई हैं और वह 800 मीटर दौड़ में शामिल होने वाली टिंटू लूका की कोच भी हैं. उषा ने कोच निकोलाय को इस उपलब्धि पर बधाई दी तो कोच ने भी पलटकर उषा को उनके तैयार किए हुए प्रतिभागियों की रेस के लिए शुभकामनाएँ दीं.

एथलीट्स और फ़ोन

एथलीट्स पदक जीतने के बाद अंदर कमरे में जाकर कपड़े बदलते हैं और फिर उन्हें पदक के लिए मैदान में ले जाया जाता है. प्रीजा श्रीधरन् और कविता राउत भी पदक लेकर फिर सीधे संवाददाता सम्मेलन में पहुँचे और उसके बाद भारतीय मीडिया ने उन्हें घेर लिया.

इस बीच में इन एथलीट्स को किसी और से बात करने की फ़ुर्सत ही नहीं मिली. अभी पत्रकारों से छूटे कि हर एथलीट की ही तरह उन्हें भी प्रतिबंधित दवाओं के मामले में परीक्षण के लिए ले जाया गया. इस परीक्षण में कुछ समय लग जाता है. जब प्रीजा परीक्षण से निकलीं और उन्होंने फ़ोन उठाया तब तक उनके मोबाइल पर 103 फ़ोन आ चुके थे जो वो नहीं उठा सकीं. उन्हें एक बार फिर पत्रकारों ने जा घेरा मगर इस बार उन्होंने माफ़ी माँगकर पहले घर में भैया-भाभी से बात की और ख़ुशियाँ बाँटने के बाद वो पत्रकारों से मुख़ातिब हुईं.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:50 [IST]
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