एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज, घर आते ही संभाली चाय की दुकान

नई दिल्ली। एशियन गेम्स में भारत के शानदार प्रदर्शन की तारीफ वाली सुर्खियां ने अखबरों में खूब जगह बनाई। लेकिन अब खिलाड़ियों की बदहाली और लाचारी धीरे-धीरे सामने आ रही है। देश के नेता खिलाड़ियों के संघर्ष के दौरान मदद के लिए नहीं आगे आते लेकिन जीत के बाद इनामों की बारिश करते हैं। देश में खेल के प्रति रवैया कैसा है यह तो जगजाहिर है। देश में चुनिंदा खेलों के खिलाड़ियों को छोड़कर अन्य खेल के खिलाड़ियों की बदहाली का एक और उदाहरण सामने आया है। एशियन गेम्स में सेपक टकरा में पहली बार मेडल दिलाने वाला खिलाड़ी घर वापस आकर अपनी चाय की दुकान पर काम करने लगा है।

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मामला दिल्ली का है। दिल्ली के मजनू का टिला में चाय की दुकान लगाने वाले हरीश ने टीम के सदस्यों संग देश के लिए पहली बार मेडल जीता। हरीश कुमार काफी गरीब परिवार से आते हैं। उनका परिवार चाय की दुकान चलाता है और उनके पिता ऑटो चलाकर घर का खर्च संभालते हैं।ऐसी चुनौतीयों से लड़कर भारत के लिए मेडल लाने वाले हरीश की जितनी तारीफ की जाए कम है। हरीश की बहन नेत्रहीन है परिवार लंबा है पिता ऑटो चलाते हैं। घर का खर्चा बढ़ने पर उनके पिता ने कहा कि दुकान के काम हाथ बंटाना शुरू करो।खेल पर ध्यान कम दो।

हरीश बताते हैं कि वह बचपन में टायर काटकर उसकी गेंद से बनाकर बचपन के दोस्तों के साथ खेलते थे।वह पैर से टायर की इस गेंद को ऊपर उछालते थे।ऐसा करते हुए उनके कोच ने एक बार उन्हें देख लिया जिसके बाद उनको सेपक टकरा खेलने के लिए प्रभावित किया और फिर इस खेल के प्रति हरीश की रुचि बढ़ती चली गई।

क्या कहते हैं हरीश:
हरीश का कहना है कि उनके घर पर कमाने वाले लोग कम हैं और खाने वाले ज्यादा, इसलिए मैं चाय बेचने का काम करता हूं। अब मैं नौकरी करना चाहता हूं ताकि अपने परिवार को संभाल सकूं। हरीश की मां इंदिरा देवी का कहना है कि हरीश के पिता ऑटो चलाते हैं और हम हरीश की मदद से चाय की दुकान संभालते हैं। हम गरीब हैं, लेकिन हमने कभी हरीश को हतोत्साहित नहीं होने दिया।

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हम सरकार और हरीश के कोच को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। हरीश के भाई का कहना है कि मैं हरीश को बधाई देना चाहता हूं कि उसने मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। हमारे कोच हेमराज सर ने हमारी प्रतिभा को पहचाना और हमें खेलने के लिए बुलाया। SAI ने भी हमारी खूब मदद की। मैं सीएम अरविंद केजरीवाल को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने हमें 50 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही हम खेल मंत्रालय को भी धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने हमें 5 लाख रुपए दिए।

क्या होता है सेपक टकरा:
सेपक टकरा, मलय और थाई भाषा के दो शब्द हैं। सेपक का मतलब किक लगाना है, वहीं टकरा का अर्थ हल्की गेंद है। वॉलीबॉल की तरह ही इस खेल में गेंद को नेट के दूसरी पार भेजना होता है। लेकिन पैर,घुटने, सीने और सिर का ही इस्तेमाल करना होता है।हाथ से गेंद लगने पर टीम की नुकसान होता है।

बता दें कि इस बार के एशियन गेम्स मेंं भारत ने 15 स्वर्ण, 24 सिल्वर, 30 कांस्य पदक जीते। यह भारत का शानदार प्रदर्शन रहा है। इससे पहले भारत ने 1951 में 15 गोल्ड मेडल जीते थे।

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Story first published: Friday, September 7, 2018, 10:31 [IST]
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