नई दिल्ली। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता और पालेमबांग में आयोजित हो रहे 18 वें एशियन गेम्स में भारत को पदक की उम्मीद निशानेबाजों, बॉक्सर्स और रेसलर्स से होगी। भारत अपना पुराना 57 पदकों का रिकॉर्ड तोड़ना चाहेगा। पिछले बार के एशियन गेम्स में भारत के पास 57 पदक आए थे।
ओलंपिक में पदक के लिए संघर्ष करते भारतीय खेमे ने इस महाद्विपीय खेल में अच्छा प्रदर्शन किया था। 1951 के बाद दूसरी बार ऐसा था जब भारत ने शीर्ष 8 में जगह बनाई थी।
18 अगस्त से होने वाले इस खेल में भारत के प्रदर्शन से ही उसके 2020 टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के प्रदर्शन का भी अंदाजा लगेगा।
भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख नरिंदर बात्रा कहते हैं कि इस बार खिलाड़ी हर खेल में पदक के लिए पूरा जोर लगा देंगे। पिछले बार हम आठवें स्थान पर थे।
शूटिंग, रेस्लिंग और बॉक्सिंग से पदक की ज्यादा उम्मीदें:
इन खेल से जुड़े खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर डाले तो लगता है कि भारत का पदक पक्का है। 16 वर्षीय मनु भाकर ने 10 मीटर राइफल शूटिंग में पदक जीता तो अनीश भानवाला ने 15 साल की उम्र में ही इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया।
रियो ओलंपिक में पैर की चोट की शिकार हुई विनेश वापसी कर रही है । उसने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और मैड्रिड में स्पेन ग्रां प्री जीती । वह 50 किलो में पदक की प्रबल दावेदार होंगी। 2010 में गोल्ड अपने नाम करने वाले विकास कृष्ण से भी काफी उम्मीदें होगी। कबड्डी में भारत ने नौ बार सोना अपने नाम किया है। वहीं हॉकी में सोने से कम जीतना भारत के लिए निराशा भरी बात होगी।
भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा न अंडर 20 विश्व चैम्पियनशिप 2016 में स्वर्ण जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में इस कामयाबी को दोहराया। पिछले चार टूर्नामेंटों में से तीन में वह स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।