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आखिर कहां जाता है IPL से कमाया हुआ पैसा, अरुण धूमल ने किया खुलासा

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने साल 2008 में देश में इंडियन प्रीमियर लीग(आईपीएल) टूर्नामेंट की शुरूआत की थी। जब इसे शुरू किया गया था तो सभी टीम फ्रेंचाइजियों ने देश-विदेश से खिलाड़ी अपने साथ जोड़े। वो भी बड़ी रकम के साथ। खिलाड़ियों की करोड़ों में बोली लगती है। हालांकि इस टूर्नामेंट का सीजन-13, जो मार्च महीने के अंत में शुरू होना था, फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए टाला गया है। लेकिन अब खबरें हैं कि बीसीसीआई साल के अंत में इसे करवा सकता है। वहीं कई बार सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठाते हैं कि बीसीसीआई पैसा कमाने के लिए इस महामारी के बीच आईपीएल करवाने की जिद्द पर अड़ा है। परंतु ऐसा नहीं है। बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष ने ऐसे लोगों को बताया है कि पैसा कहां उपयोग होता है।

यहां लगता है IPL का पैसा

यहां लगता है IPL का पैसा

धूमल ने कहा कि लोग ये ना कहें कि आईपीएल पैसा कमाने का जरिया है। आईपीएल से बोर्ड और खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता प्रदान हुई है। इसके साथ ही इस फील्ड बाहर के हजारों लोगों को भी रोजगार प्रदान हुआ है। यहां तक कि आईपीएल ने यात्रा और पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा दिया है। अरुण धूमल ने एक बेवसाइट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''यह बातें हो रही हैं कि आईपीएल एक पैसा बनाने वाली मशीन है, अगर ऐसा है तो फिर पैसा कौन लेता है? वह पैसा खिलाड़ियों के पास जाता है ना कि पदाधिकारियों के पास जाता है। वह पैसा राष्ट्र के विकास में जाता है, यात्रा और पर्यटन उद्योग के कल्याण के लिए जाता है। टैक्स के रूप में यह पैसा देश के विकास में जाता है।''

मीडिया को बदलना हो रुख

मीडिया को बदलना हो रुख

हाल ही में यह मांग भी उठाई गई कि आईपीएल को चीनी कंपनी 'वीवो' से करार तोड़ देना चाहिए। लेकिन बीसीसीआई ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था क्योंकि इससे फायदा मिलता है। अब ऐसे सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए धूमल ने कहा, ''हम पैसों के लिए विरोध क्यों करें। खिलाड़ियों और टूर्नामेंट का आयोजन करने वाले मौजूद सभी लोगों को पैसे दिए जाते हैं। अब मीडिया को भी लोगों को इसके प्रति जागरू करना होगा और इस टूर्नामेंट के लाभ के बारे में बताना होगा, जो हो रहा है। अगर बीसीसीआई कर के रूप में हजारों करोड़ का भुगतान कर रहा है, तो यह राष्ट्र-निर्माण में जा रहा है। ये पैसा सौरव गांगुली, जय शाह या मेरी जेब में नहीं जा रहा। सही? तो ऐसे में आपको यह जानकर खुशी होनी चाहिए कि अगर खेल पर पैसा खर्च करने के बजाय पैसा बनाया जा रहा है।''

440 करोड़ रूपए का है सालाना करार

440 करोड़ रूपए का है सालाना करार

बता दें कि मोबाइल निर्माता कंपनी वीवो ने 2199 करोड़ रुपए की बोली लगाकर 2017 में पांच साल के लिए आईपीएल के टाइटल प्रायोजन अधिकार हासिल किए थे। इस तरह सालाना करार 440 करोड़ रूपए का रहा जो 2022 में खत्म होगा। वहीं बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली आईपीएल 2020 नहीं होने पर तकरीबन 4000 करोड़ रुपए नुकसान की बात कह चुके हैं। हाल ही में इस करार को लेकर धूमल ने कहा था कि जो भी पैसा आ रहा है उसमें से 42 फीसदी भारत सरकार और भारतीय सेना के पास जा रहा है।

Story first published: Monday, July 6, 2020, 15:56 [IST]
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