हालांकि कार्य की समीक्षा के लिए तकनीकी पैनल के गठन का अपना प्रस्ताव रद्द करते हुए फेनेल ने कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन यानी सीजीएफ के सीईओ माइक हूपर के दिल्ली में ही रहने की घोषणा की है. दो महीने पहले यहां हुई सीजीएफ आमसभा की बैठक में फेनेल ने तैयारियों की सुस्त चाल पर चिंता जताते हुए पैनल के गठन का प्रस्ताव रखा था जिसमें विदेशी विशेषज्ञों की नियुक्ति का प्रावधान था.
आयोजन समिति और भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने इसका विरोध करते हुए हूपर को भी तैयारियों में 'बाधा' बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की. लेकिन इस बार कलमाड़ी का रुख़ बदला हुआ लगा. उन्होंने कहा, "हूपर अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं और वह खेलों के आयोजन तक यहीं रहेंगे. हम सभी का एक लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों को कामयाब बनाना है और हम इन खेलों को सफलतम बनाने के लिए एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं."
फेनेल ने नेहरू स्टेडियम और एसपी मुखर्जी तैराकी परिसर के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "इन दोनों में निर्माण कार्य काफी पीछे चल रहा है. इस देरी का असर आयोजन समिति की संचालन योजना पर पड़ेगा, खासकर टेस्ट इवेंट के आयोजन पर."
उन्होंने कहा, "इससे अधिक देरी बर्दाश्त नहीं हो सकती. मुझे खुशी है कि खेल मंत्री एमएस गिल ने मुझे आश्वासन दिया कि समय रहते निर्माण कार्य नई तारीखों के भीतर पूरा हो जाएगा." नेहरू स्टेडियम में ही दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल 2010 के उद्घाटन और समापन समारोह आयोजित होने हैं.
सुरक्षा को लेकर कई देशों द्वारा आशंका जताए जाने की बात स्वीकार करते हुए फेनेल ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि भारत में इसे प्राथमिकता में रखा जाएगा. कुछ ब्रिटिश जिम्नास्टों के राष्ट्रमंडल खेलों से कन्नी काटने के सवाल पर हूपर ने कहा कि ये जिम्नास्टों का व्यक्तिगत मामला हो सकता है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि ब्रिटिश टीम ही भारत नहीं आना चाहती.