ताज़ा मामला लंदन की एक ऐसी कंपनी का है, जिसे लाखों पाउंड दिए गए. एक निजी टीवी चैनल ने अपनी विशेष रिपोर्ट में इस कंपनी पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं.हालाँकि राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट का कहना है कि जो भी पैसे कंपनी के खाते में स्थानांतरित किए गए हैं, उसके लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया.
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हड़बड़ी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में ललित भनोट ने कहा, "हमने रिज़र्व बैंक से अनुमति ली थी. कंपनी से सामान ख़रीदने के लिए जो भी प्रक्रिया का पालन करना था, हमने किया. हर चीज़ें पारदर्शी है."समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ ब्रिटेन में राजस्व अधिकारियों के अनुरोध पर प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है. मामला पिछले साल अक्तूबर में लंदन में हुए क्वीन बैटन रिले के समय का है.
उस समय एएम फ़िल्म्स यूके लिमिटेड को क़रीब 1.8 करोड़ रुपए दिए गए थे. ब्रितानी राजस्व अधिकारियों के सवालों के बारे में ललित भनोट ने कहा कि अगर उस कंपनी की वहाँ की सरकार के साथ कोई समस्या है, तो वे कुछ नहीं कह सकते.
ललित भनोट के मुताबिक़ इस कंपनी से कार और वैन लिए गए थे. साथ ही वीडियो मोबाइल बोर्ड्स भी ख़रीदे गए थे और इसके लिए कंपनी को कुछ पैसे भुगतान किए गए और कुछ पैसे बैंक खाते में भेजे गए.मामला उस समय ब्रितानी कर और राजस्व अधिकारियों के ध्यान में आया, जब आयोजन समिति ने वैट राशि की मांग की और दूसरी ओर कंपनी ने टैक्स में छूट के लिए दावा किया.
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो ब्रितानी अधिकारियों ने भारतीय उच्चायोग से कंपनी के बारे में जानकारी और टैक्स में छूट के लिए उसके दावे के बारे में सवाल पूछे हैं. साथ ही यह भी बताया है कि आयोजन समिति और इस कंपनी के बीच कोई लिखित अनुबंध नहीं है और न ही इसके लिए निविदाएँ ही मंगाई गई थी.पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने यह मामला खेल मंत्रालय के पास भेजा, जहाँ से यह मामला जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय के पास भेज दिया गया है.
इससे अलग केंद्रीय सतर्कता आयोग ने राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े निर्माण कार्यों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि ज़्यादातर मामलों में प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया.आयोग ने बोली लगाने की प्रक्रिया, चुनी गई कंपनियों और निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्रियों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं.आयोग की रिपोर्ट पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत आयोजन समिति के अधिकारियों ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. हालाँकि शीला दीक्षित ने ये ज़रूर कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.