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ऑस्ट्रेलियाई कंपनियाँ मुक़दमे की राह पर

By Super
राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी स्पैक्टैक प्रोडक्शन के मालिक रिक बर्च ने कहा है कि खेलों के दौरान उनकी कंपनी की सेवाओं का बकाया भुगतान नहीं मिलने की वजह से वे आयोजन समिति के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू कर रहे हैं.

रिक बर्च का दावा है कि आयोजन समिति पर विभिन्न विदेशी कंपनियों का लगभग 50 लाख डॉलर की राशि बकाया है. समारोह में आतिशबाज़ी का प्रबंध करने वाली कंपनी ने भी कहा है कि अगर अगले 48 घंटों में उन्हें भुगतान नहीं किया गया तो वे क़ानूनी कार्रवाई करेंगे.

जबकि आयोजन समिति का कहना है कि जाँच-पड़ताल और टैक्स से जुड़ी कार्रवाई में वक़्त लग गया इसलिए भुगतान में देर हो रही है. भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भी इस मामले को उच्च स्तर पर उठाने और इसे सुलझाने का आश्वासन दिया है.

बीबीसी से विशेष बातचीत में रिक बर्च ने कहा कि न तो उन्हें हज़ारों डॉलर का बकाया भुगतान मिला है और न ही समारोह के दौरान इस्तेमाल किए गए उपकरण उन्हें वापिस मिले हैं. उनका कहना था कि उन्हें विभिन्न कंपनियों से फ़ोन आ रहे हैं और वो सब भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा, "हमने दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर भारतीय खेल आयोजकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर करने की तैयारी कर ली है. पिछले तीन महीनों से हमें ये झांसा दिया जा रहा है कि हमें हमारा भुगतान जल्द ही मिलेगा. जब मैंने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट से इस बारे में बात की, तो उनका कहना था कि हमें हमारा भुगतान इसलिए नहीं दिया जा रहा है क्योंकि खेलों के दौरान हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं था. ललित भनोट को तो आप जानते ही हैं. उन्होंने पहले भी भारत की स्वच्छता मानकों को लेकर एक अजीबोग़रीब बयान दिया था."

राष्ट्रमंडल खेलों में आतिशबाजी का प्रबंध करने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी हावर्ड एंड सन्स ने भी दावा किया है कि आयोजन समिति पर उनके साढ़े तीन लाख डॉलर बकाया हैं.

कंपनी के मालिक एंड्रयू हावर्ड ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्होंने बकाया बिलों को लेकर ललित भनोट और सुरेश कलमाडी से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्हें बार-बार टाल दिया गया. उन्होंने धमकी दी है कि अगर अगले 48 घंटों में उन्हें उनका पैसा नहीं दिया गया तो वे भी आयोजन समिति के ख़िलाफ़ क़ानूनी रास्ता अपनाएंगे.

इन आरोंपों के जवाब में आयोजन समिति में वित्तीय मामलों के मुख्य के यूके रेड्डी ने कहा है कि जाँच-पड़ताल और टैक्स से जुड़ी कार्रवाई में वक़्त लगने की वजह से भुगतान में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि बकाया बिल चुकाने की कार्रवाई जारी है और जल्द ही इस मामले को निपटा दिया जाएगा.

ये मामला ऐसे समय में उठा है जब भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं. जब एक प्रेसवार्ता में उनसे इस बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने आश्वासन दिया कि वे भारत लौटने के बाद ये मामला उच्च स्तर पर उठाएंगे.

विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने कहा, "जैसे ही मैं भारत लौटूंगा, वैसे ही मैं इस मामले से खेल मंत्रालय को अवगत करवाउँगा. इस मामले पर मैं आस्ट्रेलिया की ओर से एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए ये कोशिश करुंगा कि बकाया राशि का भुगतान अगले कुछ दिनों में हो जाए. "

कृष्णा के ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष केविन रड ने भी इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि वे ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों का पूरा समर्थन करेंगें और सुनिश्चित करेंगें कि उनकी समस्या का जल्द से जल्द निदान हो.

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले विदेशी कंपनियों को ठेके दिये जाने पर भी काफ़ी बवाल हुआ था. आलोचकों का कहना था कि जो काम भारतीय कंपनियां कम दाम में कर सकती थीं उसे विदेशी कंपनियों से करवाने से पैसा बर्बाद किया गया.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:55 [IST]
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