संस्था चाहती है कि ग़रीबों के लिए रखे गए धन को राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के लिए कैसे इस्तेमाल किया गया, इसकी एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. दिल्ली में सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वे इन आरोपों पर ग़ौर कर रहे हैं. ये रिपोर्ट केंद्र और दिल्ली सरकार की राष्ट्रमंडल खेलों के लिए बनाई गई योजना और धन जुटाने के तरीक़ो पर गंभीर अभ्यारोपण है.
रिपोर्ट कहती है कि समाज के पिछड़े तबकों और अनुसूचित जातियों की सहायता के लिए रखे गए धन को खेलों के आयोजन में ख़र्च किया गया है. रिपोर्ट ये भी कहती है कि राष्ट्रमंडल खेलों पर हो रहा ख़र्च नियंत्रण के बाहर चला गया है और खेलों का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए तय की गई राशि में 2000 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ोतरी हुई है.
साथ ही खेलों की वजह से एक लाख से अधिक लोगों को अपने घरबार छोड़ने पड़े हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस साल अक्तूबर में शुरु होने वाली खेलों से पहले 40,000 परिवार और विस्थापित हो जाएंगे. इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले सयुंक्त राष्ट्र मानव अधिकार के एक पूर्व अधिकारी मिलून कोठारी ने बीबीसी को बताया है कि ग़रीबों के फ़ंड को खेलों में इस्तेमाल के सबूत स्पष्ट हैं.
कोठारी के मुताबिक दिल्ली को एक विश्व-स्तर के शहर के रुप में दिखाने की होड़ में सरकार लोगों के प्रति अपनी क़ानूनी और नैतिक प्रतिबद्धता को भूल गई है.