टी-20 वर्ल्ड कप के बीच चली टी-10 फॉर्मेट की चर्चा, क्या ये साबित होगा क्रिकेट का भविष्य
नई दिल्लीः आईसीसी का टी20 वर्ल्ड कप समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है क्योंकि दो सेमीफाइनल मुकाबले पूरे हो चुके हैं और अब यह प्रतियोगिता केवल एक मैच की मेहमान रह गई है। वनडे क्रिकेट ने जिस तरह से टेस्ट मैचों के बीच अपनी जगह बनाई थी उससे कहीं ज्यादा तेजी से टी20 ने वनडे और टेस्ट दोनों के बीच अपनी धाक जमाई है। आज यह क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय फॉर्मेट है। टी20 क्रिकेट का पहला वर्ल्ड कप 2007 में हुआ था और तब से इस खेल ने काफी तरक्की की है। आज कई लीग टी20 फॉर्मेट में खेली जाती है। लेकिन वक्त ने फिर से बदलाव की करवट लेनी शुरू कर दी है। अब द हंड्रेड और टी10 जैसे नए फॉर्मेट भी आने शुरू हो गए हैं। ये टी20 से कम समय में पूरे होने वाले और ज्यादा मनोरंजन करने का दावा करने वाले हैं।

T10 जगाता है नई उत्सुकता और उम्मीदें-
इनमें टी10 को लेकर लोगों की उत्सुकता ज्यादा है क्योंकि यह कई लीगों में खेला जाने लगा है और क्रिस गेल से लेकर फाफ डु प्लेसिस का कहना है कि ओलंपिक के लिए यह एकदम बढ़िया फॉर्मट है। टी20 क्रिकेट कितना भी लुभावना हो लेकिन यह खत्म होने में अभी भी तीन घंटे से ज्यादा ले लेता है जो बाकी लोकप्रिय खेलों की तुलना में अभी भी काफी ज्यादा समय है।
अबू धाबी में 19 नवंबर से 4 दिसंबर तक अबू धाबी टी10 लीग चलेगी। टी10 का फॉर्मट फैंस को काफी लुभा रहा है क्योंकि यहां पर एक टीम केवल 60 गेंदें ही फेंकती है और पूरा मैच डेढ़ घंटे में खत्म हो जाता है। अबू धाबी टी10 लीग को पहली बार दिसंबर 2017 में ही देखा गया था। इसने तब से लेकर अब काफी लोकप्रियता पाई है। इयान मोर्गन, वीरेंद्र सहवाग, शाहिद अफरीदी जैसे धुरंधर ओलंपिक के लिए इस फॉर्मेट का समर्थन कर चुके हैं। अबू धाबी टी10 के अलावा कतर में भी टी10 लीग खेली जाती है।
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फुल एंटरटेनमेंट की गारंटी-
टी10 के पक्ष में एक बात यह जाती है कि ये लीग काफी मनोरंजक है। समय कम होने से फुल एंटरटेनमेंट की गारंटी है। ऐसे में यह चीन और अमेरिका जैसे देशों समेत वहां भी काफी लोकप्रिय हो सकता है जहां पर परंपरागत क्रिकेट प्रारूप अपनी पैठ नहीं बना सके। टी20 ने यह साबित करके दिखाया भी है कि आपको क्रिकेट के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए उस देश में क्रिकेट का खेला जाना जरूरी नहीं है। आजकल समय कम है और मनोरंजन के साधन तेज, ऐसे समय की मांग में टी10 पूरी तरह फिट बैठता है।

ओलंपिक में क्रिकेट को एंट्री दिलाने की संभावना वाला फॉर्मेट-
टी10 के ओलंपिक में जगह बनाने के आसार टी20 की तुलना में अधिक होंगे। कोई भी खेल ओलंपिक में जगह बनाने के बाद नई किस्म की पहचान दुनिया के स्तर पर पाता है। यह फॉर्मेट ऐसा है कि आयोजक आसानी से 10 दिन का बढ़िया टूर्नामेंट प्लान कर सकते हैं। यह ओलंपिक में इस्तेमाल किया जा सकता है।
हाल में ही इंग्लैंड के धाकड़ ओपनर जेसन रॉय ने कहा था कि टी10 क्रिकेट के बाकी फॉर्मेट में के साथ-साथ चल सकता है। रॉय ने कहा है कि जो लोग क्रिकेट के सभी फॉर्मेट खेल चुके हैं उनके लिए टी10 बहुत मजेदार है।

टी10 की चुनौतियां-
हालांकि चुनौतियां कम नहीं है क्योंकि अभी इंटरनेशनल क्रिकेट का शेड्यूल पूरी तरह से पैक है। यहां टी20, वनडे और टेस्ट मैचों के अलावा किसी और तरह के क्रिकेट के लिए जगह नहीं बचती। ऐसे में टी10 के लिए वर्ल्ड कप कराना निकट भविष्य में मुश्किल मालूम होता है। किसी फॉर्मेट के वर्ल्ड कप के बिना उसको वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता भी मिलना मुश्किल होगा। लेकिन लीग स्तर पर टी10 की बढ़ती लोकप्रियता आईसीसी के लिए भी नए दरवाजे खोल सकती है और क्रिकेट की यह सर्वोच्च संस्था अपने इंटनरेशनल कार्यक्रम में इसको जगह देकर वैध कर सकती है। इसमें कुछ समय लगना तय है।
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पहली गेंद से ही शुरू हो जाती है मारकाट-
टी10 में खिलाड़ियों का टारगेट पहली ही गेंद से मारकाट मचाना और स्कोर को 100 पार पहुंचाना होता है। फिलहाल टी10 गेम में एक बॉलर को 2 ओवर करने की ही छूट होती है और पॉवरप्ले 3 ओवर का होता है जिसमें 30 गज के दायरे के बाहर केवल दो ही फील्डरों को खड़े होने की अनुमति होती है। 3 ओवरों के बाद अधिकतम 5 खिलाड़ियों को 30 गज के दायरे के बाहर किया जा सकता है।
क्योंकि केवल 60 गेंद फेंकी जाती हैं तो पारी के दौरान किसी तरह का ब्रेक नहीं लिया जाता लेकिन पारी के बाद आपको 10 मिनट का ब्रेक मिलता है।

भारत में भी बन रही है पैठ-
टी20 के महानतम बल्लेबाजों में शामिल क्रिस गेल भी टी10 के ओलंपिक में जाने की संभावना को लेकर उत्साह प्रकट कर चुके हैं। गेल का यह भी कहना है कि टी10 अमेरिका जैसे देशों में कराया जा सकता है और यह ज्यादा पैसा जुटा सकता है।
भारत में भी टी10 क्रिकेट धीरे-धीरे उभर रहा है। यहां पर भारत की टी10 एसोसिएशन इस फॉर्मेट की देखभाल के लिए बनाई गई है। एसोसिएशन के पास भारत को उत्तरी भाग से 12 टीमें हैं। भारत में इस फॉर्मेट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां पर उन खिलाड़ियों को भी मौका मिल जाता है जो किसी कारण से अपने राज्यों की टीमों में स्थान पाने से चूक गए।
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