अपने 'पहले प्यार' की वजह से धोनी ने लिया 15 अगस्त को संन्यास का फैसला
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने अपने 16 सालों के करियर को 15 अगस्त 2020 को अलविदा कह दिया। धोनी ने आजादी के 74वें मौके पर अपने करियर को अलविदा कहते हुए लिखा कि आप सभी ने मुझे अपना काफी प्यार दिया इसके लिये शुक्रिया, आज शाम 7:30 बजे के बाद से आप मुझे रिटायर्ड समझें। हमेशा मैदान पर अपने अदभुत फैसलों और करियर में अपनी टीम को कई खिताब जिताने वाले धोनी ने अचानक से संन्यास का ऐलान कर दुनिया भर में अपने फैन्स को चौंका दिया जो कि उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे।
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पर क्या आप जानते हैं कि धोनी ने अपने संन्यास के लिये 15 अगस्त की तारीख को ही क्यों चुना, इसका जवाब ढूंढने में शायद आप कई अंदाजे लगाते नजर आयें लेकिन असल में इसके पीछे एक ही कारण है और वो है धोनी का 'पहला प्यार'।
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देश प्रेम है धोनी का पहला प्यार
धोनी के खेल की काबिलियत के बारे में तो हर कोई जानता है लेकिन अपने देश के लिये उनका प्रेम सबसे पहले आते हैं। धोनी ने कई मौकों पर यह साबित किया है कि उनके लिये देश से बड़ा कुछ भी नहीं है। धोनी ने कई बार साबित किया है कि उनके लिये राष्ट्र प्रेम सबसे ऊपर है शायद यही वजह रही कि उन्होंने क्रिकेट के अलावा भारतीय सेना में अपनी सेवा देने का फैसला किया।

विश्व कप के लिये प्रेग्नेंट पत्नी के पास नहीं रुके धोनी
उल्लेखनीय है कि साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड की मेजबानी में खेले गए विश्व कप के दौरान धोनी ही भारतीय टीम के कप्तान थे और उस वक्त उनकी पत्नी साक्षी धोनी भी प्रग्नेंट थी। हालांकि इसके बावजूद धोनी ने देश के लिये विश्व कप खेलना अपनी प्राथमिकता रखा और पिता बनने की खबर मिलने के बावजूद वह अपने देश की खातिर घर नहीं लौटे। इस बारे में जब उनसे बात की गई तो उन्होंने साफ कह दिया था कि इस समय उनके लिये देश जरूरी है बाकी सभी इंतजार कर सकते हैं।

भारतीय सेना से जुड़े एमएस धोनी
श्रीलंका के खिलाफ साल 2011 में विश्व कप फाइनल जिताने वाले धोनी के लिये यह साल बेहद खास था क्योंकि देश के लिये 28 साल का सूखा मिटाने के बाद माही को उनके करियर सबसे बड़ा सम्मान मिला और उन्हें भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से नवाजा। धोनी ने खुद एक मौके पर कहा था कि अगर वो क्रिकेटर नहीं होते तो सैनिक बन जाते। लेफ्टिनेंट कर्नल का सम्मान मिलने के साथ ही धोनी ने पैराट्रूपर ट्रेनिंग पूरी की और पिछले साल कश्मीर में विक्टर फोर्स के साथ भी जुड़े।

आर्मी यूनिफॉर्म में लिया पद्म भूषण सम्मान
देश के लिये धोनी का प्यार इस बात से भी पता चलता है कि जब उन्हें साल 2018 में पद्म भूषण के सम्मान से नवाजा गया तो उन्होंने यह सम्मान सेना की वर्दी में ग्रहण किया। सम्मान मिलने के बाद जब उनसे सेना की वर्दी में इसे लेने पहुंचने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आर्मी की यूनिफॉर्म में इस सम्मान को हासिल करना इस खुशी को दस गुना बढ़ा देता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, 'जो भी लोग वर्दी में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं और उनके परिवार भी जो कष्ट उठा रहे हैं उसके लिए उनका धन्यवाद। आपकी कुर्बानी की वजह से ही हम लोग खुशी मना पाते हैं और अपने अधिकारों को जी पाते हैं।'

पुलवामा हमले के बाद आर्मी कैप पहनकर खेला वनडे मैच
इतना ही नहीं साल 2019 में जब पुलवामा में भारतीय सेना के एक आर्मी कैम्प पर हमला हुआ था तो धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में रांची में हुए मैच में आर्मी कैप पहनकर खेला। भारतीय टीम ने सेना के सम्मान में और पुलवामा आतंकी हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आर्मी कैप पहनी थी। साथ ही धोनी और पूरी टीम इंडिया ने अपनी मैच फीस शहीदों के परिवारों को दान में दी थी।
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