5 खिलाड़ियों ने किया था 20 जून को डेब्यू, 4 बने भारतीय टीम के कप्तान
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 20 जून का दिन किसी बड़े ऐतिहासिक दिन से कम नहीं है। इसका कारण है आज ही के दिन डेब्यू करने वाले भारतीय क्रिकेटर और उनकी ओर से हासिल किये गये। ज्यादातर फैन्स 20 जून को इस वजह से खास जानते हैं क्योंकि 1996 में इसी दिन भारतीय क्रिकेट टीम के महान कप्तान सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने एक साथ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। पर क्या आप यह जानते हैं कि 20 जून को ही 3 अन्य भारतीय खिलाड़ियों ने डेब्यू किया जिन्होंने आगे चलकर न सिर्फ भारतीय टीम की कमान संभाली बल्कि देश के लिय शानदार प्रदर्शन करते हुए कई अहम मैच भी जिताये।
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20 जून को डेब्यू करने वाले भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो इसमें सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, विराट कोहली, अभिनव मुकुंद और प्रवीण कुमार का नाम शामिल है। इन सभी खिलाड़ियों ने शानदार क्रिकेट खेला है और इनमें से 4 ने तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम की कप्तानी भी की है। हालांकि अभिनव मुकुंद ने इंडिया ए की कप्तानी की है लेकिन वहां पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर भारत को जिताया।
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गांगुली ने किया था दमदार डेब्यू
यूं तो सौरव गांगुली को साल 1992 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे के लिये टीम में चुना गया था लेकिन इस टेस्ट सीरीज में उन्हें डेब्यू करने का मौका नहीं मिला। 4 साल बाद वह एक बार फिर इंग्लैंड दौरे पर भारत के साथ जुड़े और 3 वनडे और 3 टेस्ट सीरीज खेलने के लिये पहुंचे। मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारत ने एजबेस्टन में खेला गया पहला टेस्ट मैच गंवा दिया था, जिसके बाद कप्तान ने सौरव गांगुली को 20 जून 1996 में लॉर्डस में हुए दूसरे मैच में प्लेइंग इलेवन में शामिल किया।
इस मैच को सौरव गांगुली ने अपने लिये अहम मौका बनाया और न सिर्फ बल्लेबाजी से बल्कि गेंदबाजी से भी शानदार प्रदर्शन किया। इस मैच में सौरव गांगुली ने 3 विकेट के साथ ही शतक भी लगाया। आगे चलकर सौरव गांगुली ने भारतीय टीम की कप्तानी की और 2003 विश्व कप में फाइनल तक का सफर तय किया। उन्हीं की कप्तानी में कई ऐसे मैच विनर खिलाड़ी भारत को मिले जिन्होंने 2011 में विश्व कप जीतने के सपने को पूरा किया।

राहुल द्रविड़ ने भी दिखाया कमाल
इंग्लैंड के खिलाफ 20 जून 1996 को हुए लॉर्डस टेस्ट में गांगुली के अलावा राहुल द्रविड़ ने भी डेब्यू किया। उन्होंने इस मैच में 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 95 रनों की पारी खेली। हालांकि भारत इस मैच को जीत तो नहीं सका लेकिन जबरदस्त प्रदर्शन के चलते ड्रॉ करने में कामयाब रहा। भारत के लिये यह टेस्ट मैच अहम था क्योंकि अगर वह इसे हार जाता तो सीरीज हार जाता।
राहुल द्रविड़ ने अपनी बल्लेबाजी स्किल्स से हर वर्ग को अपना फैन बना लिया। वह भारतीय टीम की दीवार कहे जाने लगे, जिनकी बल्लेबाजी के आगे हर गेंदबाज बेबस नजर आता था। राहुल द्रविड़ ने 2002 में ईडन गार्डन्स में खेले गये ऐतिहासिक टेस्ट मैच में वीवीएस लक्ष्मण के साथ शानदार पारी खेली और जीत में अहम भूमिका निभाई। वह आगे चलकर भारतीय टीम के सफल कप्तान भी बनें।

15 साल बाद विराट कोहली ने भी किया टेस्ट डेब्यू
भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली ने भी 15 साल बाद 20 जून को ही वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में टेस्ट डेब्यू किया। विराट के कद के हिसाब से उनके लिये यह मैच कुछ खास यादगार नहीं रहा लेकिन मौजूदा समय में वह इस प्रारूप के सबसे सफल कप्तान और बल्लेबाज हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गये मैच में विराट कोहली ने पहली पारी में 4 तो दूसरी पारी में 15 रन बनाये थे।
विराट कोहली ने पूर्व कप्तान एमएस धोनी की कप्तानी में डेब्यू किया था लेकिन मौजूदा समय में वह टीम की कमान संभाल रहे हैं और उन्हीं की कप्तानी में भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में पहले नंबर पर काबिज है।

अभिनव मुकंद ने भी किया था 20 जून को डेब्यू
विराट कोहली के अलावा अभिनव मुकंद ने भी वेस्टइंडीज के खिलाफ किंग्सटन में डेब्यू किया था हालांकि उनके लिये भी यह मैच फ्लॉप साबित हुआ। इस मैच में अभिनव मुकुंद ने पहली पारी में 11 और दूसरी में 25 रन बनाए थे। अभिनव मुकुंद टीम इंडिया के लिए ज्यादा नहीं खेल पाए, लेकिन उन्होंने कई वर्षों तक तमिलानडु क्रिकेट टीम की कमान संभाली। यही नहीं, उन्होंने कई मौकों पर इंडिया ए की भी कप्तानी की। अभिनव मुकुंद ने घरेलू क्रिकेट में निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन किया। अभिनव मुकुंद ने टीम इंडिया के लिए 14 पारियों में 320 रन बनाए। इसमें दो अर्धशतक शामिल थे। उनका उच्चतम स्कोर 81 रन रहा।

प्रवीण कुमार ने किया था शानदार आगाज, लेकिन चोट ने किया बाहर
विराट कोहली, अभिनव मुकुंद की तरह प्रवीण कुमार ने भी किंग्सटन में डेब्यू किया था और उनके लिये यह मैच बेहद कमाल का रहा। हालांकि वह ज्यादा समय तक भारतीय टीम को अपनी सेवायें नहीं दे सके। प्रवीण कुमार ने इस मैच में 6 विकेट लेकर भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
आगे चलकर वह चोट के कारण ही 2011 विश्व कप की टीम में चुने जाने के बावजूद नहीं खेल सके थे। प्रवीण कुमार ने 2011 में ही 6 टेस्ट मैच खेले। इसमें उन्होंने 27 विकेट हासिल किए। उनका प्रदर्शन कतई खराब नहीं था, लेकिन चोट के कारण वह दोबारा टीम में वापसी नहीं कर पाए।
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