राष्ट्रमंडल खेल : लिम्बा ने दिलाई तीरंदाजी टीम को कामयाबी
जयंत के. सिंह
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय तीरंदाजी टीम ने शानदार सफलता अर्जित करते हुए 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की टीम स्पर्धाओं में चार पदक जीते। भारत की रिकर्व महिला और पुरुष तथा कम्पाउंड महिला एवं पुरुष टीमों ने पदक हासिल किए। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार पदक हासिल किया है और इसका पूरा श्रेय राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच लिम्बा राम को मिलना चाहिए।
लिम्बा को जनवरी 2010 में तीरंदाजी संघ ने बतौर राष्ट्रीय कोच नियुक्त किया था। कोच बनने के साथ ही लिम्बा ने राष्ट्रीय टीम को राष्ट्रमंडल खेलों में सफलता दिलाने की तैयारी शुरू कर दी। शुरुआती दौर में पंजाब नेशनल बैंक के लिए काम करने वाले लिम्बा इसके लिए जयपुर छोड़कर नई दिल्ली आए।
इसी बीच मीडिया ने खबर दी कि आजीवन अविवाहित रहकर देश की सेवा करने वाले इस महान निशानेबाज के पास रहने के लिए घर नहीं है। यहां तक कि राष्ट्रीय टीम का कोच बनने के बाद भी उनके पास घर नहीं था। मीडिया के मुताबिक लिम्बा विधायक अर्जुन सिंह बवानिया के निवास परिसर में स्थित एक कार गैरेज में रहते थे।
वर्ष 1991 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजे गए लिम्बा ने मीडिया से इस मामले को तूल न देने का आग्रह किया और साथ ही यह भी कहा कि वह अपनी मर्जी से बवानिया के निवास के गैरेज में रहते हैं, क्योंकि यहां उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिली हुई हैं और सबसे अहम बात यह कि उन्हें इससे अधिक जगह की जरूरत भी नहीं है।
लिम्बा राम एक समय भारतीय तीरंदाजी का पर्याय थे। लिम्बा कोई मामूली खिलाड़ी नहीं हैं। आज जो प्रसिद्धि विजेंदर, सुशील और ओलंम्पिक कांस्य पदक जीतने वाले दूसरे खिलाड़ियों को मिली है, लिम्बा वह प्रसिद्धि 1993 के बार्सिलोना ओलंपिक में ही हासिल कर सकते थे, लेकिन उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वह 70 मीटर वर्ग में एक अंक से कांस्य पदक हासिल करने से चूक गए।
तीन बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके लिम्बा ने 1992 में बीजिंग में आयोजित एशियाई तीरंदाजी चैम्पियनशिप में ताकायोशी मात्शुशीता के विश्व रिकार्ड (357/360) की बराबरी करते हुए स्वर्ण पदक जीता था।
लिम्बा को अपनी राष्ट्रीय टीम पर भरोसा था। वह जानते थे कि उनके खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत सकते थे और इसी को आधार मानकर उन्होंने तैयारी शुरू की। जयंत तालुकदार, तरुणदीप रॉय और रोहन बनर्जी की रिकर्व टीम ने कांस्य जीतकर जो सफलता हासिल की है, उसमें लिम्बा की कठिन मेहनत के साथ-साथ गुरु के तौर पर उनका बहुत बड़ा योगदान है।
भारत की महिला तीरंदाजी टीम बेहद प्रतिभाशाली है। विश्व चैम्पियन डोला बनर्जी के अलावा इस टीम में युवा खिलाड़ी दीपिका कुमारी और दिग्गज बोम्बाल्या देवी शामिल थीं। इस टीम ने कोच के बताए रास्ते पर चलते हुए कम्पाउंड में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा।
भारत ने इससे पहले कभी भी राष्ट्रमंडल खेलों की तीरंदाजी स्पर्धा में स्वर्ण नहीं जीता था। 28 वर्ष पहले जब तीरंदाजी राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा था, तब भारत क्वालीफाई नहीं कर सका था। अब जबकि इसे दोबारा इन खेलों में शामिल किया गया है, भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण, एक रजत (पुरुष कम्पाउंड) और दो कांस्य (महिला कम्पाउंड तथा पुरुष रिकर्व) पदक जीते।
एक खिलाड़ी के तौर पर लिम्बा पहले ही खुद को साबित कर चुके थे और अब एक कोच के तौर पर उन्होंने साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय टीम को किसी विदेशी कोच की नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर परचम लहराने के लिए सही माहौल और उचित मार्गदर्शन की जरूरत है। लिम्बा ने अब कुछ दिन आराम करने के बाद लंदन ओलंपिक का लक्ष्य भेदने की योजना बनाई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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