भाजपा नेता सुषमा स्वराज का आरोप था कि खेल मंत्री कह रहे हैं कि कोई जवाब चाहिए तो सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करे, तो वे जवाब देंगे. सुषमा स्वराज का कहना था कि खेल मंत्री संसद की गरिमा को कम कर रहे हैं और इसको मुद्दा बनाकर भाजपा सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया.
टोका टोकी के बीच लोकसभा में जवाब में उन्होंने कहा ये किसी दल के खेल नहीं हैं, ये देश के खेल हैं. गिल ने कहा कि हरेक को खेलों की चिंता है क्योंकि सवाल भारत की इज़्ज़त का है.
'खेल हो अच्छे हों'
खेल मंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि अच्छे खेल हों और सभी लोग खुश होकर जाएँ. गिल का कहना था,''खेलों में अब बहुत कम दिन रह गए हैं और बारात दरवाज़े पर खड़ी है और अब तो हमें उनके स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.'' उनका कहना था कि 35 दिन बाद तो हज़ारों लोग भारत में उतरने लगेंगे.
खेल मंत्री का कहना था कि अब ये सवाल बेमानी है कि खेल होने चाहिए कि नहीं क्योंकि ये फ़ैसला तो वर्ष 2003 में किया जाना था, अब तो स्वंयवर रचा लिया है. भ्रष्टाचार के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी शिकायत होगी, सवाल होंगे, उनकी पूरी जोर से जाँच की जाएगी.
उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही वो सांसदों को स्टेडियम का दौरा कराने ले जाएँगे. उन्होंने स्वीकार किया कि 1982 की तरह इन खेलों की एक कमान नहीं है. ग़ौरतलब है कि 1982 के एशियाई खेलों के दौरान एक समिति गठित की गई थी और उसकी कमान सरदार बूटा सिंह के हाथों में थी.