'मैं हूं मार्कस रैशफॉर्ड, 23 साल का ब्लैक'- नस्लीय बर्ताव सहने के बाद आई इंग्लिश फुटबॉलर की प्रतिक्रिया
नई दिल्लीः इंग्लैंड के स्टार मार्कस रैशफोर्ड ने रविवार को यूरो 2020 फाइनल में इटली से इंग्लैंड की शूट-आउट हार में पेनल्टी मिस करने के लिए माफी मांगते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर एक नोट साझा किया। रैशफोर्ड इंग्लैंड के उन तीन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें शूट-आउट में स्पॉट-किक नहीं मिली, और इटली ने 3-2 से मैच जीता।
इंग्लैंड के फैंस का दिल टूटने के बाद रैशफोर्ड, जादोन सांचो और बुकायो साका सभी को सोशल मीडिया पर नस्लीय दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा। सोमवार की रात, इंग्लैंड के स्टार ने एक पॉवरफुल मैसेज ट्विटर पर लिखा, "मेरी पेनाल्टी इतनी अच्छी नहीं थी, इसे गोल के अंदर जाना चाहिए था लेकिन मैं कभी भी माफी नहीं मांगूंगा कि मैं कौन हूं और कहां से आया हूं"।
उनका यह ट्वीट अपने ब्लैक रंग को लेकर हो रहे हो-हल्ले के बीच आया है। उन्होंने साफ किया है कि वे अपने रंग को लेकर बिल्कुल भी विचलित नहीं हैं और ना ही इसके लिए उन्हें कोई शर्मिंदगी है। हां, उनसे गोल मिस हुआ लेकिन उसका चमड़ी के रंग से कोई लेना-देना नहीं था।
फाइनल में अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में इंग्लैंड के मैनेजर गैरेथ साउथगेट द्वारा रैशफोर्ड और सांचो को लाया गया था, खासकर इसलिए कि वे पेनल्टी ले सकें। लेकिन जुआ का कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि दोनों मौके से चूक गए।
रैशफोर्ड ने आगे लिखा, "एक पेनल्टी ही थी जिसके लिए मुझे कहा गया था। मैं अपनी नींद में पेनल्टी स्कोर कर सकता हूं तो वह अब क्यों नहीं हुआ? यह मेरे सिर में बार-बार खल रहा है और शायद एक शब्द नहीं है कि मैं ये बता सकूं कि ये कैसा लगता है।"
— Marcus Rashford MBE (@MarcusRashford) July 12, 2021
उन्होंने आगे इसके लिए माफी भी मांगी और कहा कि 55 साल का इंतजार खत्म किया जा सकता था लेकिन यह नहीं हो सका। इंग्लैंड के स्टार ने युवा प्रशंसकों से प्राप्त हाथ से लिखे नोट्स की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनके पास उनके लिए कुछ उत्साहजनक शब्द थे। इसी बीच ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन और अन्य लीडर्स ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन दुरुपयोग पर निराशा व्यक्त की।
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