नई दिल्ली। रियो ओलंपिक में अपनी दावेदारी के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले सुशील कुमार से कोर्ट ने दो टूक सवाल पूछा है। कोर्ट ने सुशील कुमार से पूछा है कि आपने अगस्त 2014 के बाद से कौन सा खिताब जीता है। कोर्ट ने सुशील कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह प्रतिक्रिया दी है।
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कोर्ट ने पूछा कि क्या अगस्त 2014 के बाद आप फॉर्म में हैं, यही सवाल है आपसे। आप पिछले डेढ़ दो साल से सक्रिय नहीं हैं, आपने कोई टूर्नामेंट या खिताब भी तबसे आपने नहीं जीता है। जस्टिस मनमोहन ने सुशील कुमार के वकील से यह सवाल पूछा। सुशील कुमार ने दावा किया था कि वह रियो के लिए बेहतर रेसलर हैं।
जस्टिस मनमोहन के सवाल के जवाब में एडवोकेट अमित सिबल ने कहा कि सुशील कुमार ने ओलंपिक में मेडल जीता है, वह बर्न आउट के खतरे की वजह से हर टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेते है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में सुशील कुमार घायल हो गये थे जिसकी वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा था।
नरसिंह यादव के रियो ओलंपिक का टिकट मिलने के सवाल पर कोर्ट ने कहा कि नरसिंह को उसी नीति के तहत रियो ओलंपिक का टिकट मिला है जिस नीति के तहत सुशील कुमार को तीन बार ओलंपिक जाने का मौका मिला था।
कोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूएफआई की नीति काफी लंबे समय से बनी हुई है जिसे सुशील कुमार गलत बता रहे हैं। वर्ष 2004, 2008, 2012 में इसी नीति की वजह से सुशील कुमार को ओलंपिक जाने का मौका मिला था। डब्ल्यूएफआई की नीति लंबे समय से यही चली आ रही है।
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सिबल ने कहा कि सुशील कुमार हमेशा से ही एकलौते उम्मीदवार थे और उन्हें डब्ल्यूएफआई पिछले वर्ष मई से ट्रेनिंग भी करा रहा था। लेकिन अचानक से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएफआई क्यों नहीं अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करता है जिसमें एक महीने पहले खिलाड़ियों का ट्रायल होता है।