अपने 'टप्पू भईया' को खोकर सदमे में लखनऊ, जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें
लखनऊ। अपने टप्पू भईया की निधन की खबर से पूरा लखनऊ बिलख रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मेयर और बैडमिंटन एकेडमी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट अखिलेश दास गुप्ता की जिनकी आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। अखिलेश दास गुप्ता यूपी के जाने-माने इंजीनियरिंग कॉलेज बीबीडी के चेयरमैन थे। हरदिल अजीज अखिलेश दास एक मिनलसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका एक लंबा राजनीतिक और सामाजिक जीवन रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, यूपी कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के साथ-साथ बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने उनके निधन पर शोक जताया है। तो आईए आज अखिलेश दास गुप्ता के सियासत से शिक्षा तक के शानदार सफर के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

31 मार्च 1961 में हुआ अखिलेश दास का जन्म
अखिलेश दास 56 वर्ष के थे। उनका जन्म 31 मार्च 1961 में हुआ था। उनके पिता बाबू बनारसी दास यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उनकी शुरुआती शिक्षा कॉल्विन से हुई थी। वो राष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन प्लेयर रह चुके थे। उन्होंने बैडमिंटन में 1977 से 1983 तक उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधत्व किया था। अखिलेश दास को जाने-माने शिक्षाविद और समाजसेवी के रूप में जाना जाता था। आपको बता दें कि अखिलेश दास को लखनऊ में लोग प्यार से टप्पू भैया कहकर बुलाते थे।

अपने फैसलों से हमेशा चर्चा में रहते थे अखिलेश दास
अखिलेश दास गुप्ता जब लखनऊ के मेयर थे, तब उन्होंने नगर निगम में जो फैसले लिए उनको लेकर वो हमेशा चर्चा में रहे। हालांकि उनके फैसलों की चर्चा अभी भी होती है। मेयर से हटने के बाद जब वो केंद्रीय इस्पात मंत्री बने तो वहां भी उन्हें लेकर चर्चाएं होती रहीं। मंत्री पद से हटाए जाने के बाद अखिलेश दास ने फिर कांग्रेस की टिकट पर एक पूर्व आईपीएस अधिकारी को लखनऊ के मेयर का चुनाव लड़वाया। बाद में बसपा के टिकट पर वो लोकसभा का चुनाव भी लड़े लेकिन हार गए। इस चुनाव के दौरान अखिलेश दास गुप्ता द्वारा होली, ईद और दीपावली के मौके पर लखनऊ के एक-एक घर में उपहार भेजवाने का फैसला भी चर्चा में रहा।

1996 में पहली बार फिर 2008 में दूसरी बार बने राज्यसभा सांसद
अखिलेश दास 1996 में कांग्रेस से पहली बार राज्यसभा सांसद बने। 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार में वह इस्पात मंत्री बने लेकिन राहुल गांधी से मतभेद के चलते उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया। इसके बाद साल 2008 में मायावती से डील कर वो फिर बसपा की टिकट पर राज्यसभा सांसद बने।

मायावती पर लगाया गंभीर आरोप और छोड़ दिया बसपा
अखिलेश दास साल 2014 के अंत में उन्होंने मायावती पर यह आरोप लगाते हुए बसपा छोड़ दिया कि बसपा सुप्रीमो ने उन्हें दोबारा राज्यसभा सांसद बनाने के लिए 100 करोड़ रुपए की मांग की थी।

विवादों से भी खूब जुड़ा था अखिलेश दास का नाम
अखिलेश दास गुप्ता का नाम इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक गठन से लेकर विवादों में रहा। बैंक ने सभी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कई घपले किए लेकिन ऊंची पहुंच और रसूख के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। खुद को घपले की आंच से बचाने के लिए अखिलेश दास ने अपनी पत्नी अलका दास के नाम पर बैंक बोर्ड का गठन किया। मामला तब भी संवेदनशील ही रहा और अंत में आरबीआई ने बैंक के बोर्ड को भंग कर दिया।

निधन की खबर सुन सन्न रह गईं सायना नेहवाल
अखिलेश दास के निधन की खबर सुनने के बाद बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल सन्न रह गईं। उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर अपना शोक व्यक्त किया है।
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