Tokyo 2020 : भले ही हार गए 'देवभूमि' के बाॅक्सर आशीष, लेकिन मां दुर्गा नहीं हैं निराश
मंडी : देवभूमि हिमाचल के बॉक्सर आशीष कुमार चौधरी भले ही टोक्यो ओलंपिक में सोमवार को पहला मुकाबला हार गए हों, लेकिन फिर भी उन्होंने कईयों का दिल जीता। आशीष पहले हिमाचली बाॅक्सर हैं जिन्होंने ओलंपिक में भाग लिया। मैच से पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। आशीष ने अपना पहला मैच चीन के बॉक्सर एर्बीके तुओहेता के साथ खेला, लेकिन वह 5-0 से हार गए। हालांकि, उनकी मां दुर्गा देवी को अपने बेटे के प्रदर्शन पर खुशी है। उन्हें उम्मीद है कि उनका बेटा आने वाले समय में बेहतर खेल दिखाएगा।
दुर्गा देवी ने कहा कि भले ही आशीष की ओलंपिक में हार हुई है लेकिन देश के लिए ओलंपिक में खेलना एक बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा, ''बेटे के प्रदर्शन से हम निराश नहीं है, बल्कि हमें उम्मीद है कि वह आने वाले समय में आशीष और बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश का नाम राैशन करेगा। आशीष का पूरा परिवार टीवी पर लाइव मैच देख रहा था। आशीष ने मैच में दमखम दिखाया लेकिन उन्हें पहले ही मैच में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने 75 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लिया था।
18 जुलाई 1994 को जन्में आशीष ने 2019 एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। उनका जन्म 18 जुलाई 1994 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धनोटू गांव में हुआ था। उनके पिता भगत राम, एक किसान हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेली है। सुशील अपने भाइयों और चचेरे भाइयों से बॉक्सिंग के लिए प्रेरित हुए। आशीष ने 9 वर्ष की उम्र में बॉक्सिंग ग्लव्स पहन लिए थे। स्कूली शिक्षा के बाद सुंदरनगर के एमएलएसएम कॉलेज में एडमिशन लिया था। यहां कोच नरेश वर्मा से बॉक्सिंग के गुर सीखे। जॉर्डन में 2020 ओलंपिक क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में भाग लेने से एक महीने पहले सुशील के पिता का देहांत हो गया था। वह इस आयोजन के सेमीफाइनल में पहुंचे और इसलिए टोक्यो में 2020 ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई किया था।
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