डांसर से ओलंपिक में नौकाचालक के तौर पर जगह बनाने वाली नेत्रा कुमानन का सफर

नई दिल्ली। भारतीय महिला नौकाचालक नेत्रा कुमानन पहली भारतीय नौकाचलक बन गई हैं जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है। ओमान में नेत्रा ने एशियाई क्वालिफायर की लेजर रेडियल में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी रम्या सरवनन को 21 अंकों की बढ़त बनाई थी। गुरुवार को नेत्रा दूसरे पायदान पर रही थी जबकि नीदरलैंड की एमा कैरलेट पहले पायदान पर रहीं। पिछले मुकाबले में नेत्रा ने जो बढ़त बनाई थी उसी के आधार पर नेत्रा ने ओलंपिक में अपनी सीट पक्की कर ली थी। 22 साल की नेत्रा इंजीनियरिंग की छात्रा हैं और पेशे से प्रशिक्षित डांसर, गायिका और एक अच्छी पेंटर भी हैं।

दूसरे स्थान पर रहीं

हालांकि नेत्रा इस बात से निराश हैं कि वह गोल्ड मेडल अपने नाम नहीं कर सकी। लेकिन इस बात को लेकर वह संतुष्ट हैं कि ओलंपिक में अपनी जगह बनाने में सफल हुई हैं। नेत्रा ने कहा कि मैं अच्छा कर सकती थी और एमा को पीछे कर सती थी, लेकिन कुछ गलतियों की वजह से मैं हार गई और अपनी गलती को सुधार नहीं पाई। मैं बहुत खुश हूं कि ओलंपिक में जगह बनाने में सफल हुई। मुझे पूरी उम्मीद है कि इससे बाकी की युवा महिला खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।

स्कूल में गाना-डांस का था शौक

बता दें कि नेत्रा ने पिछले सा स्पेन में ट्रेनिंग की थी, जब वह स्कूल में थीं तभी नौकायन में उनकी दिलचस्पी बढ़ गई थी। नौकायन के अलावा नेत्रा को टेनिस, बास्केटबॉल और साइकिलिंग से काफी लगाव है। नौकायन को गंभीरता से करियर के तौर पर लेने के लिए नेत्रा को गायिकी और डांस का शौक छोड़ना पड़ा। नेत्रा ने बताया कि मुझे अभी भी लगता है कि भरतनाट्यम ने मुझे काफी कुछ सिखाया है। इससे मुझे अनुशासन, कड़ी मेहनत और लगन इन चीजों से अभी भी मुझे मदद मिलती है। नेत्रा ने 6 साल तक अपनी ट्रेनिंग गुरू अलार्मेल वाली के साथ की।

पिता हैं बहुत खुश

नेत्रा के पिता ने कहा कि यह बहुत ही खुशी की बात है कि नेत्रा ने ओलंपिक में जगह बनाई है। यह ना सिर्फ नेत्रा बल्कि पूरी भारतीय टीम के लिए खुशी की बात है। हमे उम्मीद थी कि नेत्रा ओलंपिक में जगह बनाने में सफल होगी, लेकिन फिर भी यह काफी तनावपूर्ण पल था। जैसे ही नेत्रा ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया मैंने राहत की सांस ली। बता दें कि पिछले साल कोरोना के चलते नेत्रा स्पेन में फंस गई थीं।

जो कुछ हूं पिता की वजह से

नेत्रा ने बताया कि स्पेन में मेरे जीवन का सबसे मुश्किल पल था, मैं घर और अपने दोस्तों को मिस कर रही थी। लेकिन इस बार जब मैं ओमान गई तो मेरा परिवार मेरे साथ था। बता दें कि नेत्रा ने 2014 मे इंचियॉन और 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था और पिछले साल मायामी में हेम्पेल वर्ल्ड कप सीरीज में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरी थी। नेत्रा ने बताया कि आज जो भी मैं हूं अपने पिता की वजह से हूं। उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया और मेरी ट्रेनिंग को भी फंड किया।

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Story first published: Friday, April 9, 2021, 13:38 [IST]
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