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कलमाडी के दावे को लगा झटका

राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने भले ही लंदन की एक अनजानी सी कंपनी को लाखों पाउंड देने के मामले में सभी प्रक्रियाओं के पालन की बात कही हो, लेकिन ये मामला अभी शांत नहीं हुआ है.

शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने कंपनी के खाते में जमा कराए गए लाखों पाउंड के बारे में स्पष्टीकरण दिया. लेकिन इस मामले में नया मोड़ उस समय आ गया, जब लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने सुरेश कलमाडी के दावे को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि उच्चायोग ने आयोजन समिति से कंपनी की सिफ़ारिश नहीं की थी.

सुरेश कलमाडी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की सिफ़ारिश पर ही एएम फ़िल्म्स यूके लिमिटेड से काम लिया गया था और उसके बदले पैसे दिए गए थे. सुरेश कलमाडी ने कहा था कि अगर कोई गड़बड़ी है भी तो वे इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं. कलमाडी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में लंदन से भारतीय उप उच्चायुक्त ने कहा कि भारतीय उच्चायोग ने ऐसी कोई सिफ़ारिश नहीं की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ भारतीय उच्चायोग के प्रवक्ता ने तो यहाँ तक कहा कि एएम फ़िल्म्स यूके लिमिटेड तो उनके पैनल में भी नहीं है. दिल्ली में हुए संवाददाता सम्मेलन में सुरेश कलमाडी ने राजू सेबेस्टियन नाम के कर्मचारी के साथ ईमेल का ज़िक्र किया था और उसके अंश भी पढ़कर सुनाए थे.

लेकिन पीटीआई के सूत्रों की मानें तो राजू सेबेस्टियन एक जूनियर कर्मचारी हैं और किसी कंपनी के नाम की सिफ़ारिश करना उनके काम के दायरे में नहीं आता. अक्तूबर में लंदन में हुए क्वींस बैटन रिले के दौरान आयोजन समिति ने इस कंपनी के कई चीज़ें ख़रीदी थी और कार सेवाएँ भी ली थी. जिसके बदले कंपनी को लाखों पाउंड दिए गए.

मामला उस समय प्रकाश में आया जब ब्रिटेन के कर और राजस्व अधिकारियों ने भारतीय उच्चायोग को पत्र लिखकर इस कंपनी के खाते में हस्तांतरित किए गए रक़म पर पूछताछ की.

एक निजी टीवी चैनल ने शुक्रवार को अपनी ख़ास रिपोर्ट में कंपनी पर कई गंभीर सवाल उठाए, साथ ही आयोजन समिति के इस कंपनी को चुनने के फ़ैसले पर भी सवाल उठाए. सुरेश कलमाडी ने संवाददाता सम्मेलन में चैनल की रिपोर्ट को ख़ारिज किया और कहा कि सब कुछ प्रक्रिया के तहत हुआ और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रखा गया है.

हालाँकि उन्होंने भी इस बात को स्वीकार किया कि कंपनी के साथ कोई लिखित करार नहीं हुआ था. अब लंदन स्थित उच्चायोग के बयान के बाद कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:41 [IST]
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