ओलिवर कान ने जीत के साथ ली विदाई
इस मैच के साथ ही मशहूर खिलाड़ी ओलिवर कान ने खेल जगत को अलविदा कह दिया. ये उनके करियर का आख़िरी मैच था. उनके इस मैच का गवाह बनने का अवसर कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम को मिला.
बायर्न म्युनिख भारत में खेलने वाला यूरोप का पहला फ़ुटबॉल क्लब है.
इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम में बेहद भीड़ थी.मैच की 90 हज़ार टिकटें पहले ही बिक चुकी थीं.
इस मौक़े पर भारतीय फ़ुटबॉल संघ (आईएफए) की तरफ़ से ओलिवर कान को सम्मानित भी किया गया.
ओलिवर कान ने 22 साल के लंबे करियर के बाद फ़ुटबॉल को अलविदा कहा. ओलिवर अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से पहले ही रिटायरमेंट ले चुके हैं.
फ़ुटबॉल का बुखार
कोलकाता में बायर्न म्युनिख के लिए ज़बरदस्त उत्साह है
जर्मनी की चैंपियन टीम बायर्न म्युनिख ऐसे वक्त भारत आई है जब आईपीएल के क्रिकेट मैचों को लेकर लोगों में जुनून है.
भारत में युवा वर्ग ने एक बार फिर फ़ुटबॉल की तरफ़ रुख किया है. खासकर मध्यम वर्ग फ़ुटबॉल खेल रहा है, देख रहा है.
जर्मनी की इस टीम को लेकर कोलकाता में कितना उत्साह रहा इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सड़कों के किनारे लगी होर्डिंग्स पर शाहरुख़ ख़ान की जगह ओलिवर कान ही दिखाई दिए.
बायर्न म्युनिख के भारत आने की मुख्य वजह है कोलकाता में इस खेल के लिए मिलने वाला पैसा.
फ़ुटबॉल के लिए भारत एक तेज़ी से चढ़ता हुआ बाज़ार बन रहा है.
भारत के बड़े शहरों में आप नौजवानों को मैनचेस्टर यूनाइटेड और चेल्सी जैसे क्लबों की जर्सियाँ पहने दिखाई दे जाएँगे.
बायर्न म्युनिख के बाद उम्मीद है कि यूरोप के दूसरे क्लब भी फ़ुटबॉल खेलते हुए दिखाई दें.
वैसे तो भारत में युवाओं का एक बड़ा वर्ग फ़ुटबॉल खेलता है लेकिन वो भारतीय क्लबों की बजाए विदेशी क्लबों को देखना पसंद करता है.
भारत में फ़ुटबॉल के लिए अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है.
बायर्न म्युनिख भारत में खेलने वाला यूरोप का पहला फ़ुटबॉल क्लब है.
इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम में बेहद भीड़ थी.मैच की 90 हज़ार टिकटें पहले ही बिक चुकी थीं.
इस मौक़े पर भारतीय फ़ुटबॉल संघ (आईएफए) की तरफ़ से ओलिवर कान को सम्मानित भी किया गया.
ओलिवर कान ने 22 साल के लंबे करियर के बाद फ़ुटबॉल को अलविदा कहा. ओलिवर अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल से पहले ही रिटायरमेंट ले चुके हैं.
फ़ुटबॉल का बुखार
कोलकाता में बायर्न म्युनिख के लिए ज़बरदस्त उत्साह है
जर्मनी की चैंपियन टीम बायर्न म्युनिख ऐसे वक्त भारत आई है जब आईपीएल के क्रिकेट मैचों को लेकर लोगों में जुनून है.
भारत में युवा वर्ग ने एक बार फिर फ़ुटबॉल की तरफ़ रुख किया है. खासकर मध्यम वर्ग फ़ुटबॉल खेल रहा है, देख रहा है.
जर्मनी की इस टीम को लेकर कोलकाता में कितना उत्साह रहा इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सड़कों के किनारे लगी होर्डिंग्स पर शाहरुख़ ख़ान की जगह ओलिवर कान ही दिखाई दिए.
बायर्न म्युनिख के भारत आने की मुख्य वजह है कोलकाता में इस खेल के लिए मिलने वाला पैसा.
फ़ुटबॉल के लिए भारत एक तेज़ी से चढ़ता हुआ बाज़ार बन रहा है.
भारत के बड़े शहरों में आप नौजवानों को मैनचेस्टर यूनाइटेड और चेल्सी जैसे क्लबों की जर्सियाँ पहने दिखाई दे जाएँगे.
बायर्न म्युनिख के बाद उम्मीद है कि यूरोप के दूसरे क्लब भी फ़ुटबॉल खेलते हुए दिखाई दें.
वैसे तो भारत में युवाओं का एक बड़ा वर्ग फ़ुटबॉल खेलता है लेकिन वो भारतीय क्लबों की बजाए विदेशी क्लबों को देखना पसंद करता है.
भारत में फ़ुटबॉल के लिए अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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