मैदान के भीतर नहीं जाने दिया पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन को, जमकर निकाली भड़ास

हैदराबाद। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन पर जमकर गुस्सा निकाला है। हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से अजहरुद्दीन को राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में स्पेशल बॉडी की बैठक में हिस्सा नहीं लेने दिया गया, जिसकी वजह से अजहरुद्दी ने एचसीए के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली। जानकारी के अनुसार स्पेशल बॉडी की बैठक सुबह शुरू हुई लेकिन उन्हें मैदान के बाहर एक घंटे तक खड़ा रखा गया और बैठक में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।

भंग किया जाए कमेटी को
हालांकि जब मोहम्मद अजहरुद्दी ने बताया कि वह टीम इंडिया के पूर्व कप्तान हैं और एक बार वह एचसीए का भी हिस्सा रह चुके हैं, तब उन्हें मैदान के भीतर जाने की इजाजत दी गई। लेकिन जब वह मैदान के भीतर पहुंचे तो बैठक खत्म हो चुकी थी, जिसके बाद अजहरुद्दीन ने एचसीए के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए उसकी जमकर आलोचना की। उन्होंने एचसीए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कमेटी को भंग कर देना चाहिए।

भ्रष्टाचार है संस्था में
अजहर ने कहा कि खिलाड़ी आरोप लगाते हैं कि उन्हें मैच खेलने के लिए लाखों रुपए देने पड़ते हैं. आप इस तरह से एजेंसी को नहीं चला सकते हैं। यह किसी का घर नहीं है, यह एक संस्था है, जोकि 1932 से चल रही है। उन्होंने बोर्ड के अन्य सदस्यों से अपील की कि वह उन्हें संस्था का सदस्य बनाए ताकि वह नए खिलाड़ियों को खेलने का मौका दिला सके जिन्हे भ्रष्टाचार के चलते खेलने का मौका नहीं मिल रहा है।

लगाए कई आरोप
इस घटना के बाद अजहर ने कहा कि इन लोगों ने मुझे मैदान के बाहर एक घंटे तक इंतजार कराया, यह काफी शर्मिंदगी भरा था। मैं हैदराबाद का खिलाड़ी हूं और दस साल तक टीम इंडिया का कप्तान रहा हूं। ये जो लोग एसोसिएशन को चला रहे हैं उन्हें क्रिकेट के बारे में कुछ भी पता नहीं है, इन लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी बैट बॉल नहीं उठाया है। अगर आप सब लोग मेरा समर्थन करें तो मैं आपसे यह वायदा करता हूं कि मैं आपकी दिक्कतों का समाधान करुंगा।
गौरतलब है कि अजहरुद्दीन ने टीम इंडिया की ओर से कुल 47 टेस्ट मैच खेले हैं। उनका अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर काफी विवादों के बाद खत्म हो गया था। उनपर 2000 में मैच फिक्सिंग का आरोप लगा था, जिसके बाद बीसीसीआई ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2012 में आंध्र प्रदेश की हाई कोर्ट ने उनपर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था।
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